बदरीनाथ में शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रम के विरोध के बीच चमोली प्रशासन ने सेना से स्पष्टीकरण मांगा

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बदरीनाथ में शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रम के विरोध के बीच चमोली प्रशासन ने सेना से स्पष्टीकरण मांगा

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  • Publish Date - September 26, 2026 / 08:13 PM IST,
    Updated On - September 26, 2026 / 08:13 PM IST

गोपेश्वर/देहरादून (उत्तराखंड), 26 सितंबर (भाषा) बदरीनाथ धाम में हाल में सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान हुए शोर-शराबे वाले संगीत और नाच-गाने के कार्यक्रम को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया है जिसके बाद चमोली जिला प्रशासन ने भारतीय सेना की स्थानीय बटालियन गढ़वाल स्काउटस को एक कारण बताओ नोटिस भेजा है।

बदरीनाथ धाम में ऐसे आयोजन की अनुमति प्रदान करने को वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी द्वारा सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताए जाने के बाद पिछले सप्ताह हुए महोत्सव को लेकर विरोध ने जोर पकड़ लिया है।

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट के ‘कमांडिंग आफिसर’ को भेजे नोटिस में कहा है कि बदरीनाथ धाम में इस प्रकार के सामूहिक आयोजन और उसमें ऊंची ध्वनि का प्रयोग करना उसकी गरिमा के विपरीत है जिससे वहां प्रतिदिन होने वाले पूजा कार्यक्रमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, धार्मिक विद्वानों को असप्रसन्नता होती है एवं स्थानीय प्रशासन की छवि भी प्रभावित होती है।

उन्होंने इस प्रकार के आयोजन के औचित्य पर सवाल उठाते हुए पूछा, ‘‘क्या बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने के संबंध में कोई अनुमति सक्षम स्तर से प्राप्त की गयी थी। कार्यक्रम में ऊंची ध्वनि का प्रयोग किन कारणों से किया गया?’’

जिलाधिकारी ने यह ताकीद भी की कि भविष्य में बदरीनाथ धाम में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाए ।

हालांकि, इस बारे में सेना ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया । सेना के एक प्रवक्ता ने इस संबंध में पूछे जाने पर कहा, ‘‘इस संबंध में आधिकारिक बयान आने पर उसे मीडिया के साथ साझा किया जाएगा।’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बदरीनाथ में शोर-शराबे वाले संगीत समारोह के आयोजन को अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाते हुए उसे न केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन,बल्कि धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात बताया।

उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण में शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी ।

नाराजगी व्यक्त करते हुए भाजपा नेता ने कहा, ‘‘उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है, साथ में इतनी ऊंचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृति के रूप में बदला जा रहा है।’’

उन्होंने शंकराचार्यों तथा महात्माओं से संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी रूप से आवाज उठाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों से भी उनका आग्रह है कि वे ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाकर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें।

उन्होंने कहा, ‘‘हिमालय देवात्मा है, भगवान शंकर का निवास और मां गंगा का उद्गम है, इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।’’

बदरीनाथ धाम में 19 और 20 सितंबर को ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026’ का आयोजन किया गया था जिसका उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा और सीमांत क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्यमिता और पर्यटन को बढ़ावा देना बताया गया था।

महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे ।

हालांकि, उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने आरोप लगाया कि आयोजकों ने बताए गए उद्देश्यों की बजाय धाम की धार्मिक परपंराओं और मान्यताओं के विपरीत नाच गाने और शोर-शराबे वाले कार्यक्रम किए।

धाम में स्थित अराइवल प्लाजा में हुए कार्यक्रमों की निंदा करते हुए महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा, ‘‘हमारा विरोध सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन को लेकर नहीं बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर है। यहां बदरीनाथ की धार्मिक और पौराणिक मर्यादाओं के अनुरूप कार्यक्रम होने चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम में शंख की ध्वनि की भी मनाही है, वहां तेज ध्वनि और संगीत का शोर उत्पन्न करना धाम की धार्मिक गरिमा के अनुरूप नहीं है।

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य मठ ने भी इस आयोजन को परंपरा-विरुद्ध, सांस्कृतिक फूहड़ता एवं धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए इस पर घोर आपत्ति जतायी।

शंकराचार्य स्वामी अवधेशानंद के शिष्य और मठ के प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने कहा कि बदरिकाश्रम वह पावन क्षेत्र है जहां ऋषियों-मुनियों ने अत्यंत शांति और संयम के नियम तय किये है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस क्षेत्र में शंख बजाना तक वर्जित है, ताकि तपस्यारत भगवान नर-नारायण एवं साधकों की एकाग्रता में कोई विघ्न न पड़े । लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से यहां का धार्मिक वातावरण बिगाड़ा जा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि जहां ब्रह्मकमल जैसे अति संवेदनशील पुष्प को भी विशेष नियमों, पवित्रता और श्रद्धा के साथ प्रभु चरणों में अर्पित किया जाता है, वहां संगीत की तेज ध्वनि में नाच-गाने और फूहड़ता का सांस्कृतिक प्रदूषण कहां तक उचित है ?

स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए परंपराओं के उल्लंघन, मर्यादाहीन कृत्यों और फूहड़ आयोजनों के जिम्मेदार आयोजकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने बदरीनाथ धाम एवं अन्य तीर्थ क्षेत्रों में संगीत कार्यक्रम, फूहड़ प्रदर्शन और शोर-शराबे वाले आयोजनों पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाने और किसी बड़े आयोजन से पूर्व शंकराचार्य जी से परामर्श एवं मार्गदर्शन लेने की अनिवार्य व्यवस्था बनाए जाने का अनुरोध किया।

भाषा सं दीप्ति राजकुमार

राजकुमार