चिनार पुस्तक महोत्सव: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बच्चों को करवाई अंतरिक्ष की सैर

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चिनार पुस्तक महोत्सव: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बच्चों को करवाई अंतरिक्ष की सैर

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  • Publish Date - July 20, 2026 / 10:41 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 10:41 PM IST

श्रीनगर, 20 जुलाई (भाषा) चिनार पुस्तक महोत्सव में सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष यात्री और ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अपने बीच पाकर बच्चे फूले नहीं समाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में जीवन, अंतरिक्ष यात्री बनने की चुनौतियाँ और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के भविष्य जैसे अनेक विषयों पर प्रश्न पूछे।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने हर प्रश्न का धैर्य, विनम्रता और रोचक अंदाज में उत्तर दिया तथा हर उत्तर के माध्यम से बच्चों को जिज्ञासा, ज्ञान और खोज के लिए प्रेरित किया।

चिनार पुस्तक महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार को श्रीनगर का आसमान भले ही बादलों से घिरा रहा हो, मगर शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (एसकेआईसीसी) का वातावरण उत्साह और ऊर्जा से सराबोर था। भारी बारिश के बावजूद घाटी के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में बच्चे, विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षक भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मिलने और सुनने पहुंचे।

पुस्तक महोत्सव के आयोजक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने सोमवार को यहां जारी एक बयान में यह जानकारी दी।

बयान के अनुसार, उत्साह एवं जिज्ञासा से भरे 2,200 से अधिक बच्चों ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अपने अंतरिक्ष नायक का स्वागत किया। चिनार पुस्तक महोत्सव के मुख्य संयोजक अमित वांचू द्वारा संचालित इस संवाद सत्र में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने भारतीय वायुसेना के पायलट से लेकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बनने तक की अपनी प्रेरक यात्रा को बहुत आत्मीयता और सहजता के साथ साझा किया।

संबोधन की शुरुआत उन्होंने यह कहते हुए की कि यह अंतरिक्ष यात्रा केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे भारत की सामूहिक यात्रा है। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है और उन्होंने अपने अंतरिक्ष प्रशिक्षण और अंतरिक्ष यात्रा के वीडियो भी दिखाए तथा जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल और रोचक प्रसंगों के माध्यम से समझाया।

उन्होंने अंतरिक्ष के कुछ अविस्मरणीय अनुभव भी साझा किए – जैसे शून्य गुरुत्वाकर्षण के कारण उनकी लंबाई कुछ बढ़ जाना, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के भीतर दीवारों पर चलना, पृथ्वी पर लौटने के बाद गुरुत्वाकर्षण की आदत छूट जाने के कारण अपना लैपटॉप गिरा देना तथा फिर से सामान्य रूप से चलना सीखना।

करीब दो घंटे तक चले इस संवाद के दौरान ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कश्मीर के विभिन्न जिलों से आए विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे किसी भी क्षेत्र में अपना करियर चुनें, उन्हें अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सदैव प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपने चुने हुए क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक युवा की महत्त्वपूर्ण भूमिका है और अपने कार्यक्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्शन के माध्यम से वे देश की प्रगति में सार्थक योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने भारत के गगनयान मिशन, भविष्य के भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तथा वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला।

पुस्तक मेले के तीसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत एक मुशायरे का आयोजन किया गया जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित शायरों रफ़ीक़ राज़, पॉपुलर मेरठी, रुख़साना जबीन, प्रोफेसर शफ़क़ सोपोरी, नोमान शौक़, प्रोफेसर अहमद महफ़ूज़, डॉ सतीश विमल तथा डॉ. शफ़ी अय्यूब ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

इसके अतिरिक्त वितस्ता फोक थिएटर, कश्मीर वैली थिएटर, यंग ड्रामेटिक्स सोसाइटी तथा मलिक बादशाह फोक थिएटर की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। दिन का समापन शाज़िया बशीर, डॉ. दीपाली वातल तथा इशरत हुसैन शाह की मधुर संगीतमय प्रस्तुतियों के साथ हुआ।

भाषा नरेश नरेश दिलीप

दिलीप