जलवायु परिवर्तन जलजनित रोगों को कम करने में हासिल प्रगति को नुकसान पहुंचा सकता है:अध्ययन
जलवायु परिवर्तन जलजनित रोगों को कम करने में हासिल प्रगति को नुकसान पहुंचा सकता है:अध्ययन
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) जलवायु परिवर्तन की वजह से बार-बार होने वाली प्रतिकूल मौसमी घटनाएं जल जनित बीमारियों को कम करने में हासिल दशकों की प्रगति को नुकसान पहुंचा सकती हैं। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
जल जनित बीमारियां मौत और बीमारी का एक बड़ा कारण हैं। खासकर कम और मध्यम आय वाले देशों और पांच साल से कम उम्र के बच्चों में इन बीमारियों का खतरा अधिक रहता है।
‘नेचर रिव्यूज माइक्रोबायोलॉजी’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन बीमारी फैलाने वाले सभी सूक्ष्मजीवों पर एक जैसा असर नहीं डालता, यह उन पर्यावरणीय स्थितियों को बदल रहा है, जो यह निर्धारित करती हैं कि सूक्ष्मजीव जीवित रहेंगे, फैलेंगे और दूसरों को संक्रमित करेंगे या नहीं।
अमेरिका में कोलोराडो एंशुट्ज विश्वविद्यालय और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं की अगुवाई में किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन दुनिया भर में जलजनित बीमारियों के प्रसार को बदल रहा है।
उन्होंने कहा कि इसलिए, जन स्वास्थ्य से जुड़े उपाय खास सूक्ष्मजीव के हिसाब से होने चाहिए, क्योंकि बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी बदलते पर्यावरणीय हालात में अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करते हैं।
कोलोराडो विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ में ‘एनवायरनमेंटल एंड ऑक्यूपेशनल’ स्वास्थ्य विभाग की प्रोफेसर और चेयर तथा इस अध्ययन की सह-लेखिका एलिजाबेथ कार्लटन ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि लोग जानें कि जलवायु परिवर्तन उन स्थितियों को बदलता है, जो सूक्ष्मजीवों (रोग पैदा करने वाले) को फैलने में मदद करती हैं।’’
कार्लटन ने कहा, ‘‘यह (जलवायु परिवर्तन) फैलने के लिए अधिक अनुकूल स्थितियां बनाकर दुनिया की कुछ सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों को नियंत्रित करना मुश्किल बना रहा है।’’
उदाहरण के लिए, अध्ययन में पाया गया कि पानी से फैलने वाली बीमारियां अक्सर बाढ़ और भारी बारिश से जुड़ी होती हैं, जिससे बीमार करने वाले सूक्ष्मजीव पीने के पानी में मिल जाते हैं, वहीं सूखा भी सुरक्षित पानी तक पहुंच को कम करके और उपलब्ध पानी के इस्तेमाल के तरीके को बदलकर बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिक तापमान से पानी से फैलने वाले बैक्टीरिया और प्रोटोजोआ जैसे रोगाणु जिंदा रह सकते हैं, अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं और अधिक खतरनाक हो सकते हैं, जबकि सूखे की स्थिति में ये रोगाणु सतह पर जमा हो सकते हैं और उपलब्ध पानी को दूषित कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि बढ़ता तापमान आम तौर पर बैक्टीरिया के पनपने में मदद करता है, जबकि नोरोवायरस, रोटावायरस और एडेनोवायरस जैसे वायरस ठंडे और सूखे मौसम में ज्यादा आसानी से फैलते हैं और गर्म दुनिया में इनकी संख्या कम हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन से जलजनित बीमारियों को कम करने की दिशा में हासिल प्रगति के लिए खतरा पैदा हो सकता है।’’
भाषा संतोष दिलीप
दिलीप

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