(नीलेश भगत)
नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) देश के नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं से जनगणना प्रपत्रों का संग्रह ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में ‘काफी कम’ रहा। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने शुक्रवार को उपलब्ध रुझानों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मतदाताओं द्वारा भरे हुए जनगणना प्रपत्रों को वापस न करने का सबसे संभावित कारण यह है कि वे काम या पेशेवर प्रतिबद्धताओं के कारण घर पर उपलब्ध नहीं हैं।
अधिकारियों ने बताया कि लगातार प्रवास को भी प्रपत्र संग्रह में कमी का एक अन्य कारण माना जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बूथ स्तर के अधिकारियों द्वारा जनगणना प्रपत्रों का संग्रह शहरी क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ, कानपुर और नोएडा उन शहरों में शामिल हैं, जहां प्रपत्र संग्रह ‘काफी कम’ रहा।
उन्होंने उन राज्यों के उपलब्ध रुझानों का हवाला दिया, जहां मतदाता सूची का एसआईआर जारी है।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल बिहार में एसआईआर के दौरान पटना सहित कई शहरों में भी ऐसा ही रुझान देखने को मिला था।
एसआईआर का दूसरा चरण चार नवंबर को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ था।
उत्तर प्रदेश को छोड़कर, अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित किया जा चुका है।
असम में मतदाता सूची का एक अलग ‘विशेष पुनरीक्षण’ जारी है।
राज्यों में पिछली एसआईआर को ‘कट-ऑफ’ तिथि के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे बिहार की 2003 की मतदाता सूची का उपयोग आयोग द्वारा गहन पुनरीक्षण के लिए किया गया था।
अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची का अंतिम एसआईआर 2002 से 2004 के बीच हुआ था और संबंधित राज्यों में हुए अंतिम एसआईआर के अनुसार, उन्होंने वर्तमान मतदाताओं की मैपिंग लगभग पूरी कर ली है।
एसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य जन्म स्थान की जांच कर विदेशी अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना है।
विभिन्न राज्यों में बांग्लादेश और म्यांमा सहित अन्य देशों से आए अवैध प्रवासियों पर की जा रही कार्रवाई के मद्देनजर यह कदम महत्वपूर्ण है।
भाषा जितेंद्र माधव
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