अहमदाबाद, 30 जून (भाषा) कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित गुजरात में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को तत्काल लागू करने की मंगलवार को मांग की। राज्य में यह योजना वर्ष 2019-20 में बंद कर दी गयी थी।
सरकार ने कहा है कि इस योजना को बंद करने का उद्देश्य किसानों को मुआवजा देने में बीमा कंपनियों के हस्तक्षेप से बचना था और जरूरतमंद किसानों को सीधे राज्य निधि से राहत प्रदान करना है।
संवाददाताओं से बातचीत में गोहिल ने राज्यसभा में पांच दिसंबर 2025 के अपने प्रश्न के जवाब का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया था कि गुजरात में यह योजना 2019-20 से लागू नहीं की गई है।
गोहिल ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा दोबारा उठाया है, क्योंकि ‘अल नीनो’ प्रभाव के कारण मानसून में देरी से फसल नुकसान की आशंका बनी हुई है।
गोहिल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री द्वारा 25 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस योजना के महत्व को बताते हुए इसे लागू करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन इसके बावजूद इसे लागू नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि यह बीमा योजना लागू होती तो पिछले वर्ष किसानों को फसल नुकसान के लिए करोड़ों रुपये का मुआवजा मिलता।
गोहिल के अनुसार, योजना के अभाव में राज्य सरकार ने किसानों को जो सहायता दी, वह बेहद कम थी और बीज व बुवाई की लागत भी पूरी नहीं कर पाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस योजना को लागू नहीं कर रही है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
वहीं, कृषि विभाग के प्रभारी निदेशक आर.पी. राजपूत ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि राज्य ने केंद्रीय योजना को बंद किया है, लेकिन 2019-20 के बाद से हर साल प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार सीधे किसानों को सहायता राशि देती है, जिसमें बीमा कंपनियों का कोई हस्तक्षेप नहीं होता।
राजपूत ने बताया कि पिछले वर्ष ही राज्य सरकार ने मूंगफली किसानों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज घोषित किया था और दो महीने के भीतर 36 लाख से अधिक किसानों के खातों में सीधे लाभ पहुंचाया गया।
भाषा अमित अविनाश
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