कांग्रेस ने यमुना जल समझौते और स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दों पर केंद्र व राजस्थान सरकार को घेरा

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कांग्रेस ने यमुना जल समझौते और स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दों पर केंद्र व राजस्थान सरकार को घेरा

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 07:13 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 07:13 PM IST

जयपुर, 30 जून (भाषा) कांग्रेस की राजस्थान इकाई ने अंतरराज्यीय जल बंटवारे, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कथित बदहाल स्थिति और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकार की आलोचना की।

इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने बीकानेर में प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में जनसभा आयोजित की। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र और राजस्थान सरकार जनहित की रक्षा करने में विफल रही हैं।

जनसभा को संबोधित करते हुए डोटासरा ने कहा कि यमुना जल बंटवारे की संशोधित व्यवस्था राजस्थान के दीर्घकालिक हितों के प्रतिकूल है और यह अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के व्यापक परिदृश्य को भी दर्शाती है।

डोटासरा ने कहा, ‘‘वर्ष 1994 के समझौते के तहत राजस्थान को पूरे वर्ष पानी मिलना था। अब इसे केवल चार महीने तक सीमित कर दिया गया है और हरियाणा को प्राथमिकता दी गई है। इससे शेखावाटी जैसे क्षेत्रों को प्रभावी रूप से उनके हिस्से के पानी से वंचित किया जा रहा है।’’

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि यह घटनाक्रम दर्शाता है कि राजनीतिक कारणों से किए गए समझौते स्थापित जल बंटवारा व्यवस्था को बदल सकते हैं, जिसके प्रभाव केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे फैसले संघीय ढांचे और प्राकृतिक संसाधनों के न्यायसंगत वितरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।’’

डोटासरा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि बिना कोई ठोस राहत दिए इस समझौते को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘केवल एमओयू पर हस्ताक्षर कर देने से लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होता। यह केवल इवेंट मैनेजमेंट की राजनीति है।’’

कांग्रेस नेता ने पूर्ववर्ती समझौतों के तहत लंबित जल आवंटन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस की सरकार थी, तब केंद्र सरकार ने मंजूरी देने में देरी की, जबकि अब राजनीतिक लाभ के लिए फैसलों में तेजी दिखाई जा रही है।

डोटासरा ने सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों को कथित रूप से ध्वस्त किए जाने का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की कार्रवाइयों का सांप्रदायिक सौहार्द पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और ऐसे मामलों को संवेदनशीलता के साथ संभाला जाना चाहिए।’’

उन्होंने सार्वजनिक अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई।

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की मौत का उल्लेख करते हुए डोटासरा ने कहा कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘गर्भवती महिलाओं की मौतों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव की खबरें व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करती हैं। ऐसी चिंताएं देश के कई राज्यों से सामने आ रही हैं।’’

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र और राज्य सरकारों पर स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

जूली ने कहा कि सरकारी अस्पतालों की बिगड़ती स्थिति से लोगों का भरोसा लगातार कम हो रहा है।

जूली ने कहा, ‘‘डर और समुचित उपचार नहीं मिलने की आशंका के कारण लोग अब सरकारी अस्पतालों में जाने से हिचक रहे हैं।’’

उन्होंने कोटा, बीकानेर, नागौर और जोधपुर जिलों में हुई कथित मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने अब तक किसी की जवाबदेही तय नहीं की है।

विपक्ष के नेता ने कहा, ‘‘यह शासन व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।’’

जूली ने राम मंदिर ट्रस्ट की एक भूमि सौदे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना जनता का विश्वास कायम रखने के लिए आवश्यक है।’’

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी इन मुद्दों को ‘‘सड़क से संसद तक’’ उठाती रहेगी। उनके अनुसार, ये केवल राजस्थान के नहीं बल्कि सुशासन, संघवाद और जनकल्याण से जुड़े व्यापक राष्ट्रीय मुद्दे हैं।

भाषा

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