कांग्रेस ने ईसी से नटराजन का नामांकन खारिज करने के फैसले को निरस्त करने का आग्रह किया

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कांग्रेस ने ईसी से नटराजन का नामांकन खारिज करने के फैसले को निरस्त करने का आग्रह किया

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  • Publish Date - June 10, 2026 / 02:52 PM IST,
    Updated On - June 10, 2026 / 02:52 PM IST

( तस्वीर सहित )

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से अपनी राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ बुधवार को निर्वाचन आयोग से शिकायत की और आग्रह किया कि निर्वाचन अधिकारी (आरओ) के ‘संविधान एवं गणतंत्र विरोधी’’ फैसले को तत्काल निरस्त किया जाए।

पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग पहुंचकर इस मामले में पार्टी का पक्ष रखा और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य आयुक्तों को ज्ञापन भी सौंपा।

इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव जयराम रमेश, भूपेश बघेल, रणदीप सुरजेवाला और वरिष्ठ नेता दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा एवं अभिषेक सिंघवी शामिल थे। इसमें खुद नटराजन भी मौजूद थीं।

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मुलाकात के बाद वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने भारत निर्वाचन आयोग के साथ विस्तार से चर्चा की और तथ्य व आंकड़े रखे।’’

वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने कहा, ‘‘हमारे प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के सामने विस्तृत रूप से अपने मुद्दे रखे हैं। मीनाक्षी नटराजन जी के मामले में आरओ का फैसला विकृत है, कानूनी रूप से गलत है, जिसका समर्थन नहीं किया जा सकता।’’

उनका कहना था कि निर्वावन अधिकारी ने जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया, वह आधार कानूनी रूप से सही नहीं हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘ऐसा कोई आपराधिक मामला नहीं है, जिसका मीनाक्षी जी खुलासा कर सकती थीं। अदालत से एक नोटिस आया, जिसमें मीनाक्षी जी से कहा गया कि आप आकर हमें बताइए कि हम इस मामले का संज्ञान लें या नहीं।’’

सिंघवी ने कहा, ‘‘कानून के पहली कक्षा के विद्यार्थी को भी पता होता है कि मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना एक प्राथमिक चरण होता है और उसमें यह फैसला किया जाता है कि यह मामला आगे चलना चाहिए या नहीं। बिना संज्ञान के कोई भी आपराधिक मामला जन्म ही नहीं लेता है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मजे की बात यह है कि चुनाव आयोग के कानून में स्पष्ट लिखा है कि आपको सिर्फ वह खुलासा करना है, जिसमें अपराध अगर सिद्ध हो तो सजा दो साल से ज्यादा हो और जिसमें आरोप तय हो चुके हैं। इसे देखने का उत्तरदायित्व आरओ का होता है।’’

सिंघवी ने कहा, ‘‘इस मामले में मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया है। व्यवस्था यह है कि मीनाक्षी जी को सुनने के बाद मजिस्ट्रेट संज्ञान लेंगे, उसके बाद जांच होगी और फिर आरोप पत्र तैयार होगा। यानी इस मामले में आगे के तीन चरण बचे हैं। मजिस्ट्रेट ने संज्ञान तक नहीं लिया है, मगर आरओ ने मान लिया कि यह एक आपराधिक मामला लंबित है।’’

उनका कहना था, ‘‘इसके अलावा, हमने कई और मुद्दे रखे और कहा है कि ऐसी गलती के कारण राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता है।’’

सिंघवी ने दावा किया कि आरओ का फैसला गणतंत्र के सिद्धांतों के विरुद्ध है और समान अवसर की स्थिति को खत्म करने वाला है तथा संविधान के मूल ढांचे को भी विकृत करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने यह भी कहा है कि निर्वाचन आयोग के पास पूरा अधिकार क्षेत्र है कि वे आरओ के फैसले को बदल दे या आदेश निरस्त कर दें। आयोग पहले भी हरियाणा और गुजरात के मामलों में हस्तक्षेप कर चुका है।’’

कांग्रेस नेता के अनुसार, यह नहीं कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग किसी भी तरह से असहाय है।

शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को रद्द कर दिया गया।

मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का अपने शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है।

उन्होंने कहा था कि इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।

मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को मतदान होना है।

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा