जम्मू, 26 जुलाई (भाषा) जम्मू में अपराध शाखा ने दो अलग-अलग मामलों में 10 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए हैं। इनमें राजस्थान की एक कंपनी से जुड़ा 30.29 लाख रुपये का निवेश धोखाधड़ी मामला और जाली राजस्व दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) हासिल करने का मामला शामिल है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि पहले मामले में अपराध शाखा की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने जयपुर स्थित ‘मैसर्स गोल्ड सुख ट्रेड इंडिया लिमिटेड’ से जुड़े धोखाधड़ी मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोप है कि आरोपियों ने निवेशकों को भारी मुनाफे का लालच देकर पैसे जमा कराए और बाद में उनके निवेश के पैसों की हेराफेरी की।
उन्होंने बताया कि यह मामला वर्ष 2011 में जम्मू के गांधी नगर पुलिस थाने में आशीष शर्मा की लिखित शिकायत पर रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, कंपनी और उसके स्थानीय प्रतिनिधियों ने अधिक मुनाफे का झूठा वादा कर उनसे 1,20,480 रुपये निवेश कराए।
बाद में इस मामले को जम्मू अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया गया। जांच में यह सामने आया कि कई निवेशकों को कंपनी की योजनाओं में निवेश के लिए कथित तौर पर प्रेरित किया गया, जिससे कुल 30.29 लाख रुपये की राशि जमा हुई।
अधिकारी ने बताया कि जांच में मिले सबूतों के आधार पर शनिवार को जम्मू की 13 एफसी विशेष सचल मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष कंपनी के अधिकारियों मानवेंद्र प्रताप सिंह चौहान, बबलू शर्मा, महेंद्र कुमार निर्वाण, नीरज कांत शर्मा और विनोद कुंडल के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।
उन्होंने बताया कि दूसरा मामला वर्ष 2016 में सूरत सिंह की शिकायत पर रणबीर दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने और सरकारी नौकरियां हासिल करने के लिए फर्जी पीआरसी बनवाए।
अधिकारी के अनुसार, जांच में पाया गया कि सरूप सिंह, बिश्वंभर सिंह, पूरब सिंह और सूरज सिंह ने तत्कालीन पटवारी रशपाल सिंह के साथ मिलकर साजिश रची और फर्जी राजस्व दस्तावेजों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी से पीआरसी हासिल किए।
अधिकारी ने बताया कि शनिवार को आरोपियों के खिलाफ जम्मू के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
भाषा प्रचेता सुभाष
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