दिल्ली की अदालत ने बैंक डकैती व हत्या मामले में पांच आरोपियों को बरी किया

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दिल्ली की अदालत ने बैंक डकैती व हत्या मामले में पांच आरोपियों को बरी किया

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  • Publish Date - May 22, 2026 / 08:08 PM IST,
    Updated On - May 22, 2026 / 08:08 PM IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2018 के बैंक डकैती एवं हत्या मामले में पांच आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ दोष साबित करने में विफल रहा।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमित दास ने सचिन (सतपाल का पुत्र), सचिन (इंद्रजीत का पुत्र), विक्की उर्फ पुष्कर, परेश और पवन पांडे के खिलाफ मामले की सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। इन पांचों पर दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के खेड़ा डाबर स्थित कॉरपोरेशन बैंक शाखा में डकैती और कैशियर की हत्या करने का आरोप था।

अदालत ने 19 मई के आदेश में कहा, “ मौजूदा मामले में अभियुक्तों ने अभियोजन की कहानी पर संदेह उत्पन्न किया है, जिसका लाभ उन्हें दिया जाना चाहिए। तदनुसार, अभियुक्त संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं।”

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 12 अक्टूबर 2018 को कॉरपोरेशन बैंक की खेड़ा डाबर शाखा में हथियारबंद लोगों ने धावा बोलकर गार्ड से हथियार छीन लिया था, लगभग तीन लाख रुपये लूटे और गोलीबारी की, जिसमें बैंक के कैशियर संतोष कुमार की मौत हो गई थी।

इस मामले में छावला थाने में डकैती, हत्या और शस्त्र अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

मुकदमे के दौरान बैंक कर्मचारियों, ग्राहकों और सुरक्षा गार्ड ने डकैती और हत्या की पुष्टि की, लेकिन उन्होंने अदालत में कहा कि वे आरोपियों की पहचान नहीं कर सके क्योंकि हमलावरों ने हेलमेट और मास्क से चेहरा ढंक रखा था।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही विश्वसनीय होनी चाहिए और केवल गवाहों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है।

अदालत ने यह भी कहा कि गवाहों ने पहचान के महत्वपूर्ण पहलू पर अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया।

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया था कि मोटरसाइकिल, पिस्तौल, नकदी और कपड़ों की बरामदगी, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों के स्वीकारोक्ति बयान से उनके अपराध में संलिप्तता साबित होती है।

अदालत ने सबूतों को अपर्याप्त मानते हुए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश

अविनाश