नयी दिल्ली, नौ मई (भाषा) दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत करने के लिए भारतीय वन अधिनियम के तहत सेंट्रल रिज क्षेत्र के करीब 673 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन का दर्जा दिया है।
दिल्ली सरकार द्वारा शनिवार को जारी एक बयान के मुताबिक, अधिसूचित क्षेत्र पश्चिमी वन प्रभाग के अंतर्गत आता है और इसमें सरदार पटेल मार्ग और राष्ट्रपति भवन के आसपास के हिस्से शामिल हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह निर्णय दिल्ली के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील रिज क्षेत्रों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिन्हें अक्सर शहर के ‘फेफड़े’ के रूप में वर्णित किया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प के साथ, हमारी सरकार ने सेंट्रल रिज क्षेत्र के लगभग 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित किया है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अधिसूचना से क्षेत्र को अधिक मजबूत वैधानिक सुरक्षा मिलेगी और अतिक्रमण, अवैध गतिविधियों और पारिस्थितिक गिरावट को रोकने में मदद मिलेगी।
भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत आरक्षित वन का दर्जा दिया गया है। आरक्षित क्षेत्रों में, विशिष्ट आदेश जारी होने तक शिकार, चराई आदि जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण के विस्तार और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और संतुलित भविष्य सुनिश्चित करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि अधिनियम की धारा 4 के तहत 1994 में प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के बावजूद रिज क्षेत्रों को अंतिम कानूनी संरक्षण प्रदान करने की प्रक्रिया लंबित रही थी।
गुप्ता ने कहा कि इस घोषणा ने एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरा किया जो तीन दशकों से अधिक समय से लंबित थी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दक्षिणी रिज क्षेत्र के लगभग 4,080.82 हेक्टेयर क्षेत्र को पिछले साल 24 अक्टूबर को आरक्षित वन घोषित किया गया था, और सरकार दिल्ली में शेष रिज क्षेत्रों को आरक्षित वन के रूप में अधिसूचित करने की प्रक्रिया में तेजी ला रही है।
उन्होंने कहा कि नवीनतम अधिसूचना के साथ, दिल्ली में रिज क्षेत्रों के कुल 4,754.14 हेक्टेयर क्षेत्र को अब आरक्षित वन का दर्जा दिया गया है।
बयान के अनुसार, सरकार की योजना रिज के उपयुक्त क्षेत्रों में नीम, पीपल, शीशम, जामुन, इमली और आम सहित देसी प्रजातियों के पौधों को बड़े पैमाने पर रोपणे की है।
भाषा धीरज माधव
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