दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाला गिरोह का भंडाफोड़, सात गिरफ्तार

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दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाला गिरोह का भंडाफोड़, सात गिरफ्तार

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  • Publish Date - October 16, 2025 / 08:44 PM IST,
    Updated On - October 16, 2025 / 08:44 PM IST

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के बहाने लोगों को ठगने वाले एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह से कथित तौर पर जुड़े सात लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों को चार राज्यों में लगभग 1,800 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए नौ दिन के अभियान के दौरान गिरफ्तार किया गया।

पुलिस उपायुक्त (डीसीपी-उत्तर) राजा बंठिया ने एक बयान में कहा, ‘यह गिरोह तब जांच के दायरे में आया जब दिल्ली के बुराड़ी निवासी 36 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को एक प्रतिष्ठित कंपनी होने का दिखावा करने वाले फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए 22 लाख रुपये से अधिक की ठगी का शिकार होना पड़ा।’

पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता मुकेश कुमार को इस साल अप्रैल में सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन मिला जिसमें एक वैध स्टॉक ट्रेडिंग फर्म का लोगो और नाम इस्तेमाल किया गया था। विज्ञापन ने उन्हें एक ऐसे ग्रुप की ओर निर्देशित किया जिसके सदस्य खुद को विशेषज्ञ ट्रेडर बताते थे और नकली मुनाफ़े के स्क्रीनशॉट शेयर करके निवेशकों को लुभाते थे।

डीसीपी ने कहा, ‘ग्रुप के एक सदस्य कपिल जयकल्याणी ने खुद को कंपनी का निदेशक बताया और पीड़ित को भरोसा दिलाया कि यह कंपनी ‘सेबी’ (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) में पंजीकृत है। पुष्टिकरण ईमेल मिलने के बाद पीड़ित आश्वस्त हो गया और उसे एक अन्य ग्रुप में जोड़ दिया गया जहां सदस्य अक्सर मुनाफा दिखाने वाले पोस्ट शेयर करते थे।’

पीड़ित को बाद में एक अन्य सदस्य दिव्यांगना थोरात द्वारा साझा किया गया एक ट्रेडिंग ‘एप्लिकेशन’ डाउनलोड करने के लिए कहा गया। जब ऐप काम नहीं किया तो उसे आगे निवेश करने के लिए एक अन्य वेबसाइट पर भेज दिया गया।

उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में उन्हें थोड़ा-बहुत मुनाफा हुआ, जिससे उन्हें और ज्यादा निवेश करने की प्रेरणा मिली। समय के साथ उन्होंने 22 लाख रुपये से ज्यादा जमा कर लिए। हालांकि, जब उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की तो स्थिति जस की तस बनी रही और अंततः उन्हें ग्रुप से ब्लॉक कर दिया गया।’

नौ जून को एक प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। जांच के दौरान, टीम ने 200 से ज्यादा मोबाइल नंबरों, आईईएमई, आईपी लॉग और ईमेल खातों का विश्लेषण किया। उन्होंने कई बैंक खातों में फैली धनराशि का भी पता लगाया।

पुलिस ने बताया कि जांचकर्ताओं ने पाया कि सोशल मीडिया समूह के सर्वरों तक मलेशिया से पहुंच बनाई जा रही थी, जिससे संभावित अंतरराष्ट्रीय संबंधों की ओर इशारा मिलता है।

डीसीपी ने कहा, ‘आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए बार-बार ठिकाने बदलते रहते थे। लगातार निगरानी के बाद हमारी टीम ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में कई छापे मारे और अंततः सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।’

उन्होंने आगे बताया कि गिरफ्तारियों की पहली श्रृंखला में पुलिस ने दिल्ली से अतुल कुमार (31), उत्तर प्रदेश से प्रशांत सिंह (31) और बिहार से भावेश कुमार खान (50) को गिरफ्तार किया।

पूछताछ के दौरान, अतुल कुमार और प्रशांत सिंह ने खुलासा किया कि उन्होंने भावेश खान के निर्देश पर चालू खाते खोलने के लिए फर्जी फर्में खोली थीं। उन्होंने कुल जमा राशि का तीन प्रतिशत देने के बदले नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल, कॉर्पोरेट आईडी और सिम कार्ड सौंपे।

भावेश खान ने पुलिस को बताया कि उसने ये खाते एक अन्य कर्ता-धर्ता अमन को पांच प्रतिशत कमीशन पर उपलब्ध कराए थे। आगे की जांच में पता चला कि चुराई गई रकम इन खातों के जरिए ऑनलाइन गेमिंग वॉलेट में भेजी गई थी।

दूसरी कड़ी में राजस्थान के झुंझुनू जिले से सुमित झाझरिया (27) और योगेश कुमार (24) को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने दुबई स्थित अपने सहयोगी राहुल को 10 प्रतिशत की छूट पर बैंक खाते बेचे थे। वे झुंझुनू से ही विवरण प्रबंधित करते थे और राहुल द्वारा भेजे गए क्यूआर स्कैनर का उपयोग करके धनराशि हस्तांतरित करते थे।

तीसरी कड़ी में गौरव (27) और विवेक कुमार सत्तावन (25) को राजस्थान के अलवर से पीछा करके पकड़ा गया। उन्होंने मेवात के सद्दाम नामक व्यक्ति को दो से तीन प्रतिशत कमीशन पर खाते उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की।

छापेमारी के दौरान पुलिस को 10 मोबाइल फोन, 14 सिम कार्ड, 17 ​​डेबिट कार्ड, एक लैपटॉप, पैन कार्ड, चेक बुक, कंपनी की मुहरें और फर्जी फर्मों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए। पुलिस ने बताया कि इन उपकरणों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण आगे की जानकारी के लिए किया जा रहा है।

अधिकारी ने बताया कि अब तक जांचकर्ताओं ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर समान बैंक खातों से जुड़ी 46 समान शिकायतों की पहचान की है। उन्होंने बताया कि गिरोह के शेष सदस्यों का पता लगाने और उनके विदेशी कनेक्शनों की पहचान करने के लिए जांच जारी है।

भाषा सुमित रंजन

रंजन