मुख्यमंत्री के कहने पर देवस्वओम विशेष अधिवक्ता ने त्यागपत्र दिया

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मुख्यमंत्री के कहने पर देवस्वओम विशेष अधिवक्ता ने त्यागपत्र दिया

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  • Publish Date - June 13, 2026 / 06:00 PM IST,
    Updated On - June 13, 2026 / 06:00 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 13 जून (भाषा) देवस्वओम विशेष अधिवक्ता के. बी. प्रदीप ने अपनी नियुक्ति को लेकर विवाद पैदा होने के बीच केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन द्वारा त्यागपत्र मांगे जाने के बाद शनिवार को इस्तीफा दे दिया।

इस बीच विपक्ष ने सरकार पर हमला तेज करते हुए नियुक्ति से जुड़ी परिस्थितियों की जांच किए जाने की मांग की।

देवस्वओम मंत्री के. मुरलीधरन ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि नियुक्ति अच्छी मंशा से की गई थी, लेकिन श्रद्धालुओं द्वारा चिंता जताए जाने के बाद इसे वापस ले लिया गया।

मंत्री ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘नियुक्ति अच्छी मंशा से की गई थी, लेकिन श्रद्धालुओं ने इस पर चिंता जताई और इसलिए मुख्यमंत्री ने उनका इस्तीफा मांगा, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।’’

विपक्षी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने देवस्वओम विभाग के अधिवक्ता के रूप में प्रदीप की नियुक्ति संबंधी कांग्रेस-नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के फैसले की आलोचना की थी।

एक आधिकारिक सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने देवस्वओम अधिवक्ता के रूप में उनका इस्तीफा मांगा था और अब उन्होंने पद छोड़ दिया है।’’

प्रदीप की नियुक्ति से राजनीतिक विवाद तब शुरू हुआ, जब माकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि वह शबरिमला मंदिर से सोने के कथित गबन से जुड़े मामलों में कुछ आरोपियों की ओर से पेश हुए थे।

नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने मीडिया से बातचीत के दौरान नियुक्ति की आलोचना की और कहा कि ‘‘बहुत अजीब घटनाक्रम’’ हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर मंत्रियों को विशिष्ट विभागों की जिम्मेदारी दी जाती है और वे उनसे जुड़े सभी मामलों के लिए जवाबदेह होते हैं।

विजयन ने पूछा, ‘‘लेकिन देवस्वओम मंत्री का यह कहना हैरान करने वाला है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी। देवस्वओम मंत्री की जानकारी के बिना ऐसा फैसला कैसे लिया जा सकता है?’’

उन्होंने कहा कि जिस अधिवक्ता ने मुख्य आरोपी व्यक्ति और संस्था की ओर से पैरवी की थी, उसी को देवस्वओम बोर्ड का अधिवक्ता नियुक्त करना ‘‘आरोपियों का साथ देने’’ के समान है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह कदम कभी नहीं उठाया जाना चाहिए था। इस फैसले को तुरंत सुधारा जाना चाहिए और दूसरी नियुक्ति की जानी चाहिए।’’

माकपा राज्य समिति के सदस्य वी. शिवनकुट्टी ने इस नियुक्ति को ‘‘स्तब्ध करने वाला’’ बताया और आरोप लगाया कि शबरिमला से सोना गायब होने के मामले के एक आरोपी की ओर से पेश हुए वकील को देवस्वओम विभाग का अधिवक्ता नियुक्त करना मामले को कमजोर करने की स्पष्ट साजिश का हिस्सा था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल अधिवक्ता के इस्तीफे से इस मामले से जुड़ा रहस्य खत्म नहीं होगा। उन्होंने कथित साजिश के पीछे मौजूद लोगों की पहचान किए जाने की मांग की।

उन्होंने नियुक्ति से जुड़ी परिस्थितियों और सोना गायब होने के मामले को कमजोर करने की कथित कोशिशों में शामिल लोगों के खिलाफ व्यापक जांच की भी मांग की।

माकपा के वरिष्ठ नेता वी. एन. वासवन ने कहा कि देवस्वओम विशेष अधिवक्ता के. बी. प्रदीप की विवादित नियुक्ति को लेकर अब भी संदेह है और जनता को तथ्य जानने का अधिकार है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं कुम्मनम राजशेखरन और पी. के. कृष्णदास ने भी कांग्रेस-नीत सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियुक्ति से दुनियाभर में भगवान अयप्पा के हजारों श्रद्धालुओं के बीच चिंता पैदा हुई है।

राजशेखरन ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने करोड़ों अयप्पा श्रद्धालुओं को झटका दिया है। यह मंदिरों और श्रद्धालुओं के साथ गंभीर विश्वासघात है।’’

कृष्णदास ने कहा कि अधिवक्ता के इस्तीफे से विवाद खत्म नहीं होता।

उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘चोरी का सामान लौटा देने से चोरी खत्म नहीं हो जाती और अधिवक्ता का इस्तीफा भी वैसा ही है। देवस्वओम अधिवक्ता की नियुक्ति श्रद्धालुओं के लिए झटका थी। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और यूडीएफ एक ही सहकारी गिरोह के दो पहलू हैं।’’

मुरलीधरन ने आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदीप को इसलिए नियुक्त किया गया था, क्योंकि वह आपराधिक मामलों के एक प्रसिद्ध वकील हैं और मामलों को प्रभावी ढंग से संभालने में सक्षम हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे श्रद्धालुओं के कई फोन आए। उन्होंने कहा कि लोगों को इस सरकार में सोना गायब होने के मामलों की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है और इस नियुक्ति से चिंता पैदा हुई है।’’

उन्होंने कहा कि इसी वजह से मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप किया और प्रदीप का इस्तीफा मांगा।

मंत्री ने कहा कि प्रदीप की नियुक्ति राज्य मंत्रिमंडल का सामूहिक फैसला था।

विवाद के बारे में पूछे जाने पर केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के अध्यक्ष और बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने कहा कि यदि कोई कमी है तो उसे दूर किया जाएगा।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘यदि कोई चूक हुई है, तो उसे सुधारा जाएगा। मामले की जांच की जाएगी और अगर कोई कमी है तो उसे दूर किया जाएगा। यह सरकार के कार्यकाल की शुरुआत है।’’

जोसेफ ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों पर फैसला सरकार करती है, पार्टी नहीं।

भाषा सिम्मी सुरेश

सुरेश