चेन्नई, 16 अगस्त (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और पट्टालि मक्कल काच्चि (पीएमके) ने कर्नाटक में 15 अगस्त को वन विभाग के कर्मियों की कथित गोलीबारी में मारे गये तीन लोगों के तमिल होने का रविवार को दावा करते हुए इस घटना की पारदर्शी जांच की मांग की।
द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने इस घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने के लिए सख़्त कार्रवाई ज़रूरी है। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा एवं रोजगार दिलाने की अपील की।
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘राज्य के वन क्षेत्र में कर्नाटक वन विभाग द्वारा तीन तमिलों की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना बेहद चौंकाने वाली है।’’
पीएमके अध्यक्ष डा. अंबुमणि रामदास ने अधिकारियों के इस दावे पर सवाल उठाया कि वे (तमिल लोग) शिकारी थे।
एक बयान में, उन्होंने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
पीएमके नेता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों का यह दावा कि वे तीनों शिकारी थे, ‘झूठा है।
उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से दखल देने और कर्नाटक सरकार से हर पीड़ित के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की अपील की।
इस बीच, रविवार को चामराजनगर और मैसूर में तीन लोगों के लिए न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए।
अधिकारियों ने बताया कि जान गंवाने वालों में से एक की पत्नी की औपचारिक शिकायत के बाद, हनूर पुलिस ने इस घटना में शामिल वन अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। यह धारा हत्या के लिए सजा से संबंधित है।
भाषा राजकुमार शोभना
शोभना