नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कहा है कि कोटक महिंद्रा बैंक के एक पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, इस निजी बैंक के दो अन्य कर्मचारियों और पंचकूला (हरियाणा) नगर निगम के एक कर्मचारी ने मिलकर राज्य के साथ 100 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है।
ईडी ने कहा कि चारों ने राज्य सरकार के विभाग के धन का ‘गबन’ करने के लिए कथित तौर पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
संघीय एजेंसी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामलों की विशेष अदालत के समक्ष नौ आरोपियों के खिलाफ 30 जुलाई को दाखिल आरोप पत्र में यह दावा किया। धनशोधन का यह मामला हरियाणा भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एससीबी) द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है। एसीबी ने पंचकूला नगर निगम के कोष में गबन के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की थी, जो एक ‘गहरी और सुनियोजित’ आपराधिक साजिश के जरिए की गई थी।
ईडी ने एक बयान में कहा कि कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह ने पंचकूला नगर निगम के अधिकारी विकास कौशिक और कोटक महिंद्रा के एक अन्य कर्मचारी दिलीप राघव के साथ मिलकर, कई ‘फर्जी’ दस्तावेजों और अधिकृत करने वाले पत्रों का इस्तेमाल करके नगर निकाय के नाम पर दो ‘अनधिकृत’ बैंक खाते खोले।
जांच एजेंसी ने बताया, ‘‘पंचकूला नगर निगम की ओर से भेजे गए सभी वास्तविक पत्रों, अधिकृत करने वाले पत्रों और निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया गया। इसके बजाय, सिंह और कौशिक ने दूसरों की मदद से इन दो अवैध खातों को खोलने के लिए कई समानांतर अधिकृत करने वाले पत्र तैयार किए।’’
ईडी ने बताया कि इसके बाद उन्होंने पंचकूला नगर निगम के नाम पर बनाए गए ‘फर्जी’ अधिकृत करने वाले पत्रों का इस्तेमाल करके, कोटक महिंद्रा बैंक में मौजूद निगम के वैध खातों से राशि ‘जालसाजी’कर खोले गए खातों में अंतरित किया।
इसमें कहा गया, ‘‘जांच में खुलासा हुआ कि कोटक महिंद्रा बैंक का सतीश कुमार भी इस जालसाजी में शामिल था।’’
ईडी ने धोखाधड़ी की कुल रकम 107.24 करोड़ रुपये बताई है और उसने मामले में अबतक 131 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।
भाषा धीरज दिलीप
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