नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि पिछले शैक्षणिक वर्षों की तरह, जिनमें सीटों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने में सफलता मिली थी, सरकार ने पीजी काउंसलिंग 2025 के लिए पात्रता अर्हता प्रतिशत को कम कर दिया ताकि बहुमूल्य पीजी मेडिकल सीटें खाली न रहें।
परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) की चिकित्सा परामर्श समिति (एमसीसी) उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित योजना के अनुसार स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए काउंसलिंग आयोजित करती है। एमसीसी द्वारा आयोजित नीट पीजी काउंसलिंग में अखिल भारतीय कोटा की 50 प्रतिशत सीटें और देश भर के केंद्रीय/मानित विश्वविद्यालयों की 100 प्रतिशत सीटें शामिल होती हैं।
उन्होंने कहा कि अर्हता प्रतिशत में संशोधित का निर्णय एमसीसी द्वारा दूसरे दौर की काउंसलिंग पूरी हो जाने के बाद लिया गया है जिसमें यह सूचित किया गया है कि एमसीसी द्वारा काउंसलिंग के लिए प्रस्तावित 29,476 सीटों में से 9,621 सीटें रिक्त रह गई थीं।
मंत्री ने कहा कि चूंकि 50 प्रतिशत सीटों के लिए काउंसलिंग संबंधित राज्य प्राधिकरणों द्वारा आयोजित की जाती है, इसलिए यह अनुमान लगाया गया कि दो दौर के बाद लगभग 20,000 सीटें रिक्त रह गई। उन्होंने कहा, ‘‘अतः उन पूर्ववर्ती शैक्षणिक वर्षों जो सीटों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने में प्रभावकारी सिद्ध हुए, के अनुरूप सरकार ने पीजी काउंसलिंग हेतु पात्रता के लिए अर्हता प्रतिशत को कम कर दिया ताकि महत्वपूर्ण पीजी सीटें खाली न रह जाएं।’’
भाषा अविनाश रंजन
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