नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कारगिल में न्यायिक अवसंरचना के विकास को एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम करार देते हुए कहा कि शहर में जिला अदालत की स्थापना से नागरिकों को भरोसा मिला है कि पहाड़ संविधान की राह में बाधा नहीं हैं और न्याय सभी के लिए सुलभ बना हुआ है।
कारगिल में रविवार को नए जिला अदालत परिसर के उद्घाटन समारोह में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि लद्दाख में रहने वाले व्यक्ति के लिए कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अदालत कक्ष तक पहुंचना अक्सर बहुत मुश्किल होता है और इसके लिए कड़े प्रयास एवं धैर्य की जरूरत पड़ती है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इसी वजह से कारगिल में न्यायिक अवसंरचना के विकास का गहरा महत्व है। यहां स्थापित अदालत केवल न्याय दिलाने का स्थान नहीं है। यह इस बात का आश्वासन है कि प्रतिकूल परिस्थितियां संविधान की राह में बाधा नहीं हैं; और न्याय यहां भी उपलब्ध और सुलभ रहेगा।’’
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि नया अदालत परिसर इस बात का भरोसा दिलाएगा कि कानून केवल इसलिए पहुंच से बाहर नहीं रहेगा, क्योंकि इलाका दुर्गम है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे भरोसा है कि यह नया जिला अदालत परिसर रेगिस्तान में हरित भूमि की तरह होगा। एक ऐसी जगह, जहां अनसुना महसूस करने वाले लोग आकर अपनी बात कह सकेंगे। जहां बोझ से दबे हुए लोग समाधान पा सकेंगे। जहां अनिश्चितता के साथ आने वाले लोग स्पष्टता और आशा लेकर जा सकेंगे।’’
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि कारगिल केवल एक स्मृति स्थल बनकर न रह जाए, बल्कि शांति के समय में इसे और मजबूत किया जाए।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हम जिस संस्था का उद्घाटन कर रहे हैं, उसके माध्यम से हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि बलिदान का सम्मान करने वाला राष्ट्र अपने लोगों को गरिमा, निरंतरता और न्याय उपलब्ध कराने के मामले में भी दृढ़ रहेगा।’’
भाषा पारुल नेत्रपाल
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