गहलोत ने राजस्थान की भाजपा सरकार पर यमुना जल समझौते को लेकर हमला बोला

Ads

गहलोत ने राजस्थान की भाजपा सरकार पर यमुना जल समझौते को लेकर हमला बोला

  •  
  • Publish Date - June 30, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 07:00 PM IST

जयपुर, 30 जून (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को यमुना जल समझौते को लेकर राज्य सरकार पर ‘दिखावटी राजनीति’ करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि सरकार जमीनी स्तर पर विशेषकर नहर सिंचित क्षेत्रों की गंभीर जल समस्याओं के समाधान में विफल रही है।

यहां अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कहा कि ‘नीम का थाना’ तक यमुना का पानी लाने को लेकर दिए गए उनके पुराने बयान को सत्तारूढ़ दल के नेता अपनी कमियों को छिपाने के लिए तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने स्पष्ट कहा था कि जिस दिन यमुना का पानी नीम का थाना पहुंच जाएगा, उस दिन मैं स्वयं मुख्यमंत्री के आवास पर जाकर उनका स्वागत करूंगा और उन्हें बधाई दूंगा। मैं आज भी अपने उस बयान पर कायम हूं।’’

गहलोत ने कहा कि समझौता एमओयू है या एमओए, इस पर बहस केवल तकनीकी विषय है। असली मुद्दा यह है कि राजस्थान को वास्तव में पानी मिले।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि राजस्थान को पानी मिलता है तो राजस्थान की जनता से अधिक खुशी किसी को नहीं होगी।’’

वर्ष 1994 के यमुना जल बंटवारा समझौते का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि इसका क्रियान्वयन एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।

उन्होंने कहा कि वर्षों तक राजस्थान और हरियाणा में भाजपा तथा कांग्रेस, दोनों दलों की सरकारें रहीं, लेकिन यह समझौता अब तक लागू नहीं हो सका।

उन्होंने कहा कि इससे शेखावाटी क्षेत्र के चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों को बड़ा लाभ मिलेगा।

गहलोत ने राजीव-लोंगोवाल समझौते के तहत राजस्थान के हिस्से के 0.8 एमसीएम पानी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब वर्षों से यह पानी रोककर बैठा है।

उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जल संबंधी मुद्दों में रुचि ले रहे हैं, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि राजस्थान को उसका वैध हिस्सा मिले।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इन प्रयासों को वास्तव में तभी सफल मानूंगा, जब राजस्थान को पंजाब से उसके हिस्से का पानी मिल जाएगा।’

उन्होंने कहा कि इससे श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर जैसे जिलों के किसानों को लाभ होगा।

नहर क्षेत्र की स्थिति का उल्लेख करते हुए गहलोत ने राज्य सरकार पर ‘घोर लापरवाही’ बरतने का आरोप लगाया।

उन्होंने हाल ही में जोधपुर दौरे का हवाला देते हुए कहा कि वहां आज भी लोग पेयजल के लिए परेशान हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। यह प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान पंजाब में राजनीतिक रूप से प्रतिद्वंद्वी दलों की सरकारें होने के बावजूद बेहतर समन्वय बनाए रखा गया, ताकि राजस्थान के किसानों को समय पर पानी मिल सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के किसान भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं और अपनी समस्याओं को लेकर जयपुर आने के लिए मजबूर हैं।

गहलोत ने सरकार से राजनीति से ऊपर उठकर सिंचाई और पेयजल के लिए समय पर पानी उपलब्ध कराने पर ध्यान देने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘पानी की कमी के कारण किसान बर्बाद हो रहे हैं। सरकार को जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए और राजस्थान को उसका वाजिब हिस्सा दिलाना चाहिए।’

भाषा

बाकोलिया रवि कांत संतोष

संतोष

शीर्ष 5 समाचार