पणजी, 27 जून (भाषा) गोवा सरकार ने व्यापक विरोध के बाद ग्रामीण क्षेत्रों को ‘शहरी क्षेत्र’ घोषित करने के प्रस्ताव पर ग्राम पंचायतों से सुझाव मांगने संबंधी अपना पत्र शनिवार को वापस ले लिया।
कांग्रेस, गोवा फॉरवर्ड पार्टी और आम आदमी पार्टी (आप) समेत विपक्षी दलों ने राज्य के राजस्व विभाग द्वारा जारी इस विवादास्पद पत्र का विरोध किया था।
पत्र में सभी पंचायतों से गोवा के 56 गांवों को शहरी क्षेत्र घोषित करने की वर्ष 2020 की अधिसूचना की समीक्षा को लेकर सुझाव मांगे गए थे।
राजस्व मंत्री अतानासियो मोनसेराट ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि ग्राम पंचायतों की सहमति के बिना शहरी क्षेत्रों को लेकर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।
अवर सचिव (राजस्व) वृषिका कौथनकर ने शनिवार को पंचायत निदेशालय को संबोधित पत्र में कहा कि पंचायतों से राय मांगने संबंधी पत्र को ‘‘वापस लिया जाता है’’।
मंत्री ने इससे पहले कहा था कि सरकार ने वर्ष 2020 में कुछ गांवों को शहरी क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया था, लेकिन बाद में उस अधिसूचना को वापस ले लिया गया था।
उन्होंने कहा कि हाल ही में ग्राम पंचायत तालेगांव ने सरकार को एक प्रस्तुतीकरण भेजकर दावा किया था कि वह जनगणना नगर (सेंसस टाउन) के लिए निर्धारित मानदंडों को पूरा करती है।
उन्होंने कहा, “इस प्रस्तुतीकरण को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच की गई और संबंधित क्षेत्र को शहरी क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया।”
भाषा जितेंद्र शफीक
शफीक