गोवा अगस्त की शुरुआत तक एनजीटी के सामने निजी जंगलों पर अंतिम रिपोर्ट पेश करेगा: मंत्री

गोवा अगस्त की शुरुआत तक एनजीटी के सामने निजी जंगलों पर अंतिम रिपोर्ट पेश करेगा: मंत्री

गोवा अगस्त की शुरुआत तक एनजीटी के सामने निजी जंगलों पर अंतिम रिपोर्ट पेश करेगा: मंत्री
Modified Date: July 17, 2026 / 05:20 pm IST
Published Date: July 17, 2026 5:20 pm IST

पणजी, 17 जुलाई (भाषा) गोवा के वन मंत्री विश्वजीत राणे ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार निजी वनों की पहचान और संरक्षण संबंधी अपनी अंतिम रिपोर्ट जुलाई के अंत तक या अगस्त के पहले सप्ताह में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के समक्ष दाखिल करेगी।

राणे ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल कर निजी वन के रूप में चिह्नित किसी भी भूमि को इस श्रेणी से बाहर किए जाने का कड़ा विरोध किया है।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘निजी वनों पर अंतिम रिपोर्ट जुलाई के अंत तक या अगस्त के पहले सप्ताह में एनजीटी के समक्ष दाखिल की जाएगी और इसकी जानकारी उच्चतम न्यायालय को भी दी जाएगी। सुनवाई लगभग पूरी हो चुकी हैं।’

मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में निजी वन के रूप में चिह्नित 554 सर्वेक्षण नंबरों को इस श्रेणी से बाहर किए जाने का विरोध किया है, जिससे इन भूखंडों को संरक्षण के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा, ‘हलफनामे में सभी 554 सर्वेक्षण नंबरों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। अब इन्हें दो स्तर का संरक्षण प्राप्त है।’

राणे ने कहा कि नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग ने भी गोवा नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम की धारा 39(ए) के तहत इन क्षेत्रों को ‘गैर विकसित क्षेत्र’ घोषित कर अतिरिक्त संरक्षण प्रदान किया है।

राणे ने धारा 39(ए) को संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील भूमि को स्थायी रूप से गैर-वन या अन्य उपयोग में परिवर्तित होने से बचाती है।

उन्होंने कहा, ‘अब वे दिन बीत चुके हैं जब नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग किसी भी भूमि का उपयोग बदल सकता था। धारा 39(ए) भूमि की रक्षक है और यह इन क्षेत्रों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखेगी।’

मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में 89.65 लाख वर्ग मीटर भूमि को ‘गैर विकसित क्षेत्र’ घोषित किया है। इसमें सत्तारी तालुका की वाघेरी पहाड़ी भी शामिल है, जिसे वन विभाग ने पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया है।

उन्होंने कहा कि वन विभाग की सिफारिशों के आधार पर मांडवी और जुआरी नदियों के किनारे स्थित पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को भी धारा 39(ए) के तहत अधिसूचित किया जाएगा।

राणे ने कहा कि सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग निजी वनों, पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, खाजन भूमि और निचले कृषि क्षेत्रों में किसी भी विकास कार्य के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि वन विभाग और टीसीपी विभाग द्वारा उठाए गए इन संयुक्त कदमों से गोवा के पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील भू-भागों को स्थायी संरक्षण मिलेगा और भूमि उपयोग में अंधाधुंध बदलाव पर रोक लगेगी।

भाषा राखी वैभव

वैभव


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