गुजरात ने केंद्र से खाने-पीने की वस्तुओं और दवाओं में मिलावट के खिलाफ सख्त कानून की मांग की

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गुजरात ने केंद्र से खाने-पीने की वस्तुओं और दवाओं में मिलावट के खिलाफ सख्त कानून की मांग की

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 10:15 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 10:15 PM IST

अहमदाबाद, 30 जून (भाषा)गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने केंद्र सरकार से खाने-पीने की चीजों और दवाओं में मिलावट के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग की।

पानशेरिय ने इसी के साथ एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए देश भर में मजबूत उपाय लागू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ये दोनों ही मुद्दे जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने मंगलवार को एक बैठक के संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि दोषियों से ज्यादा प्रभावी ढंग से निपटने के लिए खाने-पीने की वस्तुओं और दवाओं में मिलावट से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को ‘खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006’ में संशोधन करना चाहिए ताकि खाने-पीने की वस्तुओं और दवाओं में मिलावट करने वालों के खिलाफ अधिक कड़े कड़े प्रावधान लागू किए जा सकें। मंत्री ने दलील दी कि मौजूदा कानून मौजूदा परिस्थितियों में अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।

पानशेरिया ने ने देश भर में एंटीबायोटिक्स के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी दवाओं के अत्याधिक और गलत तरीके से इस्तेमाल की वजह से रोगाणु इनके प्रति प्रतिरोध विकसित कर रहे हैं जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।

मंत्री ने कहा कि अक्सर एंटीबायोटिक्स बिना जरूरत के अनुशंसा की जाती हैं, बिना सही देखरेख के सीधे खरीदी जाती हैं या मरीज़ खुद इनकी मांग करते हैं, जिसके कारण समय के साथ आम संक्रमणों के खिलाफ इन दवाओं का असर कम हो जाता है।

पानशेरिया ने केंद्र से एंटीबायोटिक के जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल के लिए एक प्रभावी राष्ट्रीय नीति बनाने और उसे सख्ती से लागू करने की अपील की।

उन्होंने सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ-साथ चिकित्सा महाविद्यालयों में भी ज़्यादा जागरूकता लाने की बात कही, ताकि अनावश्यक दवाइयां लिखने की प्रवृत्ति को कम किया जा सके।

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र सरकार से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) राजकोट में पूरी तरह से सुसज्जित अंग प्रत्यारोपण सुविधा विकसित करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अभी आधुनिक प्रत्यारोपण सेवाएं मुख्य रूप से अहमदाबाद और सूरत में ही केंद्रित हैं, जिससे उन क्षेत्रों के मरीजों को ही लाभ मिल पाता है।

उन्होंने कहा कि राजकोट में एक अंग प्रत्यारोपण केंद्र बनने से सौराष्ट्र और कच्छ के हजारों मरीजों के लिए बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी, जिन्हें अभी ऐसी सुविधाओं तक सीमित पहुंच ही मिल पाती है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी वाली इस बैठक में ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ के तहत कई डिजिटल स्वास्थ्य पहल शुरू की गईं। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नए डिजिटल मंच और ‘एनीमिया मुक्त भारत’ अभियान के संचालन के लिए दिशानिर्देश शामिल हैं।

पानशेरिया ने कहा कि केंद्र ने राज्यों को स्वास्थ्य योजनाओं को तेज़ी से लागू करने और गरीब व मध्यम-वर्गीय लाभार्थियों के लिए आवंटित कोष का समय पर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

भाषा धीरज माधव

माधव

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