वडोदरा, 30 जून (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि गुजरात रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर सकता है तथा अपनी औद्योगिक ताकत, दक्ष श्रमिकों और उद्यमिता की भावना के जरिए भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा में अहम भूमिका निभा सकता है।
यहां मध्य गुजरात क्षेत्र के लिए चौथी ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस’ (वीजीआरसी) के समापन समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में रक्षा उत्पादन और निर्यात में काफी प्रगति की है, लेकिन पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ‘‘अभी भी लंबा सफर तय करना बाकी है।’’
उन्होंने कहा कि भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 के लगभग 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि इसी दौरान रक्षा निर्यात लगभग 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 39,000 करोड़ रुपये हो गया है।
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि, मैं इसे सिर्फ शुरुआत मानता हूं। हमें अभी लंबा सफर तय करना है और मेरा मानना है कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करने में गुजरात बहुत अहम भूमिका निभा सकता है।’’
रक्षा विनिर्माण में गुजरात के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए सिंह ने कहा कि वडोदरा टाटा-एयरबस सी-295 ट्रांसपोर्ट विमान कार्यक्रम के तहत भारत में निजी क्षेत्र का पहला सैन्य विमान विनिर्माण केंद्र है, और इसे देश की एयरोस्पेस यात्रा में एक अहम पड़ाव बताया।
उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया के सबसे अत्याधुनिक तोपखाना प्रणालियों में से एक, के9 वज्र प्लेटफॉर्म का निर्माण गुजरात में किया जाता है, जिससे भारतीय सेना की मारक क्षमता काफी बढ़ गई है।
सिंह ने कहा कि साणंद और धोलेरा में विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर केंद्र भारत की प्रौद्योगिकीय संप्रभुता की नींव बनेंगे, जबकि रसायन, पेट्रोकेमिकल, इंजीनियरिंग, बंदरगाह, जहाज निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्रों में गुजरात की ताकत अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी के विकास में मदद कर सकती है।
मंत्री ने कहा कि रक्षा और एयरोस्पेस उद्योग पर आयोजित एक संगोष्ठी के दौरान उन्होंने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम, स्टार्टअप के प्रतिनिधियों से बातचीत की तथा भारत में रक्षा विनिर्माण बढ़ाने के लिए बहुमूल्य सुझाव प्राप्त किए।
सिंह ने गुजरात को भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘‘विकास इंजन’’ बताते हुए कहा कि 2003 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई ‘वाइब्रेंट गुजरात’ पहल अब एक वैश्विक स्तर पर पहचाने जाने वाले मंच के रूप में विकसित हो चुकी है, जो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दृष्टि के अनुरूप है।
इससे पहले दिन में, सिंह ने ‘‘एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत’’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में हिस्सा लिया, जहां उनकी मौजूदगी में गुजरात के रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए 2,550 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गए।
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश