नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने पश्चिम एशिया संकट से निपटने के सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि संभावित खतरों से बचते हुए भारत ने परिपक्व तथा कुशल कूटनीतिक तरीके से स्थिति को संभाला है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर भी दिया कि भारत को शांति बहाली के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ और रणनीतिक साझेदार देशों को एकजुट करने का प्रयास करना चाहिए।
शर्मा ने एक बयान में कहा, ‘‘ईरान पर अनुचित अमेरिकी-इजराइल हमले और उसकी जवाबी प्रतिक्रिया के बाद पश्चिम एशिया में जो हालात पैदा हुए हैं उसके परिणामस्वरूप वैश्विक उथल-पुथल और गंभीर आर्थिक व्यवधान उत्पन्न हो गया है। भारत और मध्य-पूर्व और खाड़ी देशों से कच्चे पेट्रोलियम, एलपीजी और प्राकृतिक गैस के आयात और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आपूर्ति पर निर्भर सभी देशों को एक अभूतपूर्व चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।’’
उनका कहना है कि यह चुनौतीपूर्ण स्थिति भारत राष्ट्रीय सामरिक प्रतिक्रिया को आकार देने में नीति और कूटनीति दोनों की परीक्षा है।
शर्मा ने कहा, ‘‘पेट्रोलियम, एलपीजी-पीएनजी की आपूर्ति, 200 अरब डॉलर के व्यापार के अलावा, एक करोड़ भारतीय प्रवासियों के हित और सुरक्षा के साथ-साथ लगभग 60 प्रतिशत विदेशी मुद्रा प्रेषण को भी ध्यान में रखना होगा।’’
उन्होंने भारत सरकार के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि संभावित खतरों से बचते हुए संकट से निपटने का भारतीय कूटनीतिक प्रयास परिपक्व और कुशल रहा है।
शर्मा ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘भारत की प्रतिक्रिया को राष्ट्रीय सहमति और संकल्प का समर्थन प्राप्त होना चाहिए। अप्रत्याशित और अस्थिर स्थिति में राजनीतिक दलों के नेतृत्व को स्थिति और नीतिगत निर्णयों से अवगत कराने के लिए सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक की है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘राष्ट्रीय संवाद कायम रहना चाहिए। राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हित द्वारा निर्देशित परिपक्व प्रतिक्रिया समय की मांग है।’’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘संकट की भयावहता को पूरी तरह से स्वीकार किया जाना चाहिए। विश्व नियम आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था और वैश्विक संकट प्रबंधन तंत्र के पतन पर मूकदर्शक नहीं रह सकता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने अतीत में अपने नैतिक अधिकार और शांति के प्रति प्रतिबद्धता का सम्मान किया है। बहुत कुछ दांव पर है, खासकर युवा पीढ़ी का भविष्य दांव पर है।’’
शर्मा ने कहा, ‘‘भारत को शांति-व्यवस्था की बहाली के लिए सामूहिक रूप से काम करने के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ और रणनीतिक साझेदार देशों को एकजुट करने का प्रयास करना चाहिए।’’
भाषा हक
हक नरेश
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