हेरफेर करके चुनाव जीतना एक बात है, अर्थव्यवस्था के लिए सुधारात्मक कदम उठाना अलग बात: कांग्रेस

Ads

हेरफेर करके चुनाव जीतना एक बात है, अर्थव्यवस्था के लिए सुधारात्मक कदम उठाना अलग बात: कांग्रेस

  •  
  • Publish Date - May 26, 2026 / 11:41 AM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 11:41 AM IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) कांग्रेस ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक बयान को लेकर मंगलवार को सरकार पर निशाना साधा और कहा कि मतदाता सूचियों में हेरफेर कर चुनाव जीतना एक बात है तथा अर्थव्यवस्था के लिए सुधारात्मक कदम उठाना पूरी तरह अलग बात है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि भारतीय व्यवसाय अब विदेशों में अधिक स्थिर और लाभकारी अवसर तलाश रहे हैं तथा भारतीय कॉरपोरेट हस्तियां भी विदेशों में बस रही हैं।

वित्त मंत्री सीतारमण ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईंधन बचत समेत मितव्ययिता के अन्य उपायों के आह्वान का समर्थन करते हुए कहा था कि पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा… इन तीन मुख्य कारकों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

सीतारमण ने मुंबई में सिडबी (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) के 37वें स्थापना दिवस समारोह में प्रधानमंत्री की अपील के बाद ‘‘नकारात्मक और निराशावादी’’ विमर्श गढ़ने वालों पर भी निशाना साधा था और और कहा था कि इस समय भारत भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘वित्त मंत्री ने कहा है कि 3एफ – ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा- गंभीर चिंता के विषय हैं। लेकिन वह चौथे और सबसे महत्वपूर्ण ‘एफ’ को भूल जाती हैं, निजी निवेश की गिरती दर, जो पिछले कुछ वर्षों से लगातार दिखाई दे रही है।’

उन्होंने दावा किया कि कुल एफडीई प्रवाह में गिरावट आई है और जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निजी कॉरपोरेट निवेश 2014 से पहले के अपने उच्चतम स्तर के आधे पर पहुंच गया है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘निवेश केवल वित्तीय निर्णय नहीं होता, बल्कि वह मनोवैज्ञानिक कारकों से भी प्रभावित होता है। व्यापक उपभोक्ता मांग में वृद्धि की कमी ने कंपनियों को निवेश से हतोत्साहित किया है। इसी तरह मोदी सरकार द्वारा बनाया गया डर, धमकी और दखलअंदाजी का माहौल भी एक मनोवैज्ञानिक बाधा है, ठीक वैसे ही जैसे मोदी सरकार का सब कुछ जानने वाला रवैया और दृष्टिकोण।’

रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘बड़े पैमाने पर मतदाता सूचियों में हेरफेर कर चुनाव जीतना एक बात है। लेकिन विनम्रता और गंभीरता के साथ यह समझना कि वास्तव में अर्थव्यवस्था को क्या बीमार कर रहा है, और उसके लिए सुधारात्मक कदम उठाना पूरी तरह अलग बात है।’

भाषा हक प्रचेता वैभव

वैभव