केसीबीसी का केंद्र से एफसीआरए संबंधी चिंताओं को दूर करने का आग्रह, पारदर्शिता उपायों का स्वागत किया

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केसीबीसी का केंद्र से एफसीआरए संबंधी चिंताओं को दूर करने का आग्रह, पारदर्शिता उपायों का स्वागत किया

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  • Publish Date - June 27, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - June 27, 2026 / 07:00 PM IST

कोच्चि, 27 जून (भाषा) ‘केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल’ (केसीबीसी) ने शनिवार को केंद्र सरकार से हाल ही में किए गए एफसीआरए संशोधनों से उत्पन्न चिंताओं को दूर करने का आग्रह किया, साथ ही विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों का स्वागत किया।

केसीबीसी ने एक बयान में कहा कि वह विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम (एफसीआरए) में संशोधन के केंद्र के उद्देश्य का पूर्ण सम्मान और समर्थन करता है, जिसका लक्ष्य विदेशी अंशदान के दुरुपयोग को रोकना और उनके उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

उसने कहा कि हालांकि हाल के संशोधन (जिनमें संचालन क्षेत्रों की संख्या पर प्रतिबंध और न्यूनतम व्यय आवश्यकताओं का प्रावधान शामिल है) कई स्वयंसेवी संगठनों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं।

परिषद ने यह भी चिंता जताई कि संशोधित प्रावधान धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।

केसीबीसी ने कहा, “हमारे संस्थान और संगठन देश के कानूनों का पूरी तरह से पालन करते हुए राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कल्याण के लिये प्रतिबद्ध हैं।”

केसीबीसी ने कहा कि वह केंद्र के साथ बातचीत जारी रखेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि “जरूरी बदलाव किए जाएं, जिससे पारदर्शी और नेक नीयत से काम करने वाले संगठन और संस्थान बिना किसी रुकावट के अपनी गतिविधियां जारी रख सकें।”

उसने कहा, “हम विदेशी धन के गलत इस्तेमाल को रोकने और उनके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के केंद्र के मकसद का पूरा सम्मान और समर्थन करते हैं।”

कांग्रेस और माकपा ने एफसीआरए संशोधन की आलोचना करते हुए कहा था कि यह अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाता है।

वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि यह सभी समुदायों से जुड़े उन सभी संगठनों पर लागू है जो विदेशी धन प्राप्त करते हैं।

भाषा

शुभम प्रशांत

प्रशांत