केरल शराब कर विवाद : माकपा ने मुख्यमंत्री पर गलतबयानी का लगाया आरोप, सुधीरन ने भी मांगी सफाई

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केरल शराब कर विवाद : माकपा ने मुख्यमंत्री पर गलतबयानी का लगाया आरोप, सुधीरन ने भी मांगी सफाई

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  • Publish Date - June 25, 2026 / 04:09 PM IST,
    Updated On - June 25, 2026 / 04:09 PM IST

पलक्कड़/ त्रिशूर, 25 जून (भाषा) केरल की मुख्य विपक्षी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता और पूर्व आबकारी मंत्री एम.बी. राजेश ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पर आरोप लगाया कि वह कम ‘अल्कोहल’ वाले पेय पदार्थों पर कर कम करने के बजट प्रस्ताव को लेकर हो रही आलोचना से ध्यान भटकाने के लिए ‘तथ्यात्मक रूप से गलतबयानी’कर रहे हैं।

वहीं, सत्तारूढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.एम. सुधीरन ने भी अपनी ही पार्टी नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया है और मांग की कि वित्त विधेयक पेश किए जाने पर सरकार इस कदम को वापस ले।

राजेश ने पलक्कड़ में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के उस दावे को खारिज कर दिया कि यह प्रस्ताव पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ)सरकार के कार्यकाल में आया गया था, जब मौजूदा माकपा राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के पास आबकारी विभाग का प्रभार था।

राजेश ने कहा, ‘‘यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत और बेबुनियाद है। जिस फाइल का उन्होंने जिक्र किया, वह सिर्फ कम अल्कोहल वाले पेयपदार्थ की परिभाषा बदलने से जुड़ी थी। कर कम करने का कोई प्रस्ताव नहीं था। यह एलडीएफ सरकार की शराब नीति का हिस्सा था।’’

उन्होंने कहा कि 2022-23 की शराब नीति में अल्कोहल युक्त पेय पदार्थों को तीन श्रेणियों -वाइन, शराब और कम अल्कोहल वाले पेय- में विभाजित करने का प्रस्ताव था और मंत्रिमंडल की मंजूरी और नियमों में बदलाव के बाद इस नीति को पारदर्शी तरीके से लागू किया गया था।

राजेश ने कहा, ‘‘एलडीएफ सरकार का कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर कम करने का कोई फैसला नहीं था।’’

माकपा नेता ने मुख्यमंत्री से अपना वह बयान वापस लेने की मांग की जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार ने कर में ऐसी कटौती की योजना बनाई थी, लेकिन विधानसभा चुनावों के कारण उसे लागू नहीं कर पाई थी।

राजेश ने आरोप लगाया, ‘‘मुझे नहीं लगता कि वह इसे वापस लेंगे क्योंकि उन्हें ऐसी आदत नहीं है।’’

उन्होंने मांग की कि ‘‘उन्हें (मुख्यमंत्री को) यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके दावे को सही ठहराने के लिए पिछली एलडीएफ सरकार ने असल में क्या किया था।’’

वहीं, कांग्रेस नेता सुधीरन ने त्रिशूर में संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि सतीशन नीत सरकार ने बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के मामले में ‘आगे बढ़ने’ का फैसला किया।

उन्होंने कहा कि अगर इस प्रस्ताव को विधानसभा में पेश करने से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन और संबंधित पक्षों के बीच विचार-विमर्श किया जाता, तो इससे जुड़े विवाद से बचा जा सकता था।

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी)के पूर्व अध्यक्ष सुधीरन ने कहा, ‘‘ वास्तव में, विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किए जाने से पहले ही राजनीतिक और कानूनी स्तर पर ऐसी चर्चाएं हो जानी चाहिए थीं। अगर ऐसा हुआ होता, तो अभी जो कई विवाद खड़े हुए हैं, उनसे बचा जा सकता था।’’

सुधीरन का यह बयान सरकार के उस संकेत के एक दिन बाद आया है जिसमें कहा गया था कि राज्य में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों की अनुमति देने के बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और शराब के बारे में एक व्यापक नीति यूडीएफ के घटकों और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के बाद ही बनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को राज्य विधानसभा में बजट पर तीन दिन चली बहस का जवाब देते हुए उन आरोपों को खारिज कर दिया कि सरकार ने कर में कटौती के जरिए शराब कंपनियों को अनुचित फायदा पहुंचाया है।

भाषा धीरज नरेश

नरेश