(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का प्रदर्शन मंगलवार को लगातार 11वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान, प्रदर्शन स्थल पर तीन दिन से अनशन पर बैठे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के ब्लड शुगर के स्तर में गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताई और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर हमला तेज करते हुए आंदोलन के प्रति उसके रवैया की आलोचना की।
आयोजकों की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को वांगचुक का रक्तचाप 117/60, ऑक्सीजन लेवल 96 और नब्ज 92 दर्ज की गई, जबकि उनके ब्लड शुगर का स्तर 66 था, जो सामान्य से कम है।
वांगचुक की जांच करने वाले डॉक्टर ने कहा, “यहां बहुत ज्यादा गर्मी है। ऐसे हालात में बिना खाने के रहना मुश्किल है। हम उनकी सेहत का ध्यान रख रहे हैं।”
कॉजपा के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि वांगचुक की हालत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वांगचुक को कुछ होता है, तो इसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार होंगे।
वहीं, दीपके ने प्रदर्शनकारियों की तुलना “वायरस” से करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा, “वे (भाजपा नेता) हमें वायरस कहते हैं। हम वायरस नहीं हैं। भाजपा नेताओं को आना चाहिए, क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान नाम के ‘वायरस’ के खिलाफ एक टीका, एक एंटी-वायरस मौजूद है।”
दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रही है, जबकि वे महज छात्रों, शिक्षा प्रणाली और जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
कॉजपा के संस्थापक ने जंतर-मंतर पर संवाददाताओं से बातचीत में भाजपा कार्यकर्ताओं पर विरोध-प्रदर्शन में बाधा डालने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “मैं पहले दिन से ही कह रहा हूं कि यहां कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। पुलिस की मौजूदगी सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि हम तक भोजन-पानी की पहुंच बाधित करने और लोगों को यहां आने से रोकने के लिए है।”
हालांकि, दीपके ने बाद में कहा कि कुछ समर्थकों को पहचानपत्र न होने की वजह से प्रदर्शन स्थल पर आने से रोका गया।
उन्होंने इस कदम पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या जंतर-मंतर आने के लिए किसी आम नागरिक को पहचानपत्र की जरूरत होती है।
दीपके ने आरोप लगाया कि कुछ किसान नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है, जबकि प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा, “अगर प्रश्नपत्र लीक में शामिल माफियाओं पर भी ऐसा दबाव बनाया गया होता, तो शायद कई छात्रों की जान नहीं जाती।”
दीपके ने दावा किया कि पुलिस लोगों के खिलाफ हिंसा के आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, जबकि प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश करने वालों पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने किसी का सिर फोड़ दिया, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है, लेकिन यहां आने वाले समर्थकों को रोका जा रहा है।”
दीपके ने परीक्षाओं में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए हाल में राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि प्रश्नपत्र जयपुर के एक कॉलेज से लीक हुआ था।
दीपके ने इसे “डबल इंजन, डबल लीक” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार परीक्षाओं का सुचारु आयोजन सुनिश्चित करने में नाकाम रही है।
कॉजपा के प्रवक्ता रांका ने कहा कि यह यह मामला सिर्फ नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) प्रश्नपत्र लीक तक सीमित नहीं है। उन्होंने अभिभावकों से विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया।
रांका ने कहा, “यह मत सोचें कि मामला सिर्फ नीट प्रश्नपत्र लीक तक सीमित है। अगर आप आज आवाज नहीं उठाएंगे, तो कल आपका प्रश्नपत्र भी लीक हो सकता है और आपकी नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।”
रांका ने दावा किया कि 2015 से लेकर अब तक प्रश्नपत्र लीक के 150 से अधिक मामले सामने आए हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे डर या किसी राजनीतिक हस्ती के समर्थन के कारण अपने बच्चों को विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेने से न रोकें।
रांका ने कहा, “अगर आप उन्हें डर या निष्ठा के कारण आगे आने से रोकते हैं, तो उनका भविष्य बर्बाद हो जाएगा।”
दीपके ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार के रवैये की आलोचना की। उन्होंने हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा।
दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा संकट को हल करने के बजाय राजनीतिक मामलों में व्यस्त है, जिनमें “पार्टियां तोड़ना”, “सांसदों की खरीद-फरोख्त” और विदेश यात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी “विश्व भ्रमण, विपक्षी दलों को तोड़ने और मेलोडी देने” में मशगूल हैं।
दीपके की इस टिप्पणी पर भीड़ ने तालियां बजाईं।
दीपके ने छात्रों की आत्महत्या के लिए भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कसूरवार ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रधान को पहली घटना के बाद ही इस्तीफा दे देना चाहिए था।
दीपके ने कहा, “अगर छात्रों की मौत हुई है, तो उनके परिजन से बात करने की हिम्मत दिखाइए। 20 से ज्यादा छात्रों की मौत के लिए प्रधान कसूरवार हैं।”
दीपके ने कहा कि तमाम मुश्किलों और व्यवधानों के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, “हम यहां डटे रहेंगे। एक व्यक्ति अपनी जान जोखिम में डाल रहा है; आप हमसे और क्या उम्मीद करते हैं?”
प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) से जुड़े छह छात्र भी लगातार तीसरे दिन शामिल हुए। उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर बने एक अलग मंच पर अपनी भूख हड़ताल जारी रखी।
इन छात्रों में आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के संयुक्त सचिव दानिश, आईसा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मनीष, संगठन की दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई के उपाध्यक्ष दीपक, जेएनयू के बराक छात्रावास के अध्यक्ष ऋषिकेश और आंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली की छात्र परिषद की केंद्रीय समिति के पूर्व सदस्य आमीन शामिल हैं।
परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर जंतर-मंतर पर कॉजपा का विरोध-प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ था।
दीपके ने कहा है कि यह आंदोलन सिर्फ शिक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जवाबदेही से जुड़े अन्य मुद्दों को भी उठाया जाएगा, जिनमें चुनावी मामले, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शामिल हैं।
भाषा पारुल नरेश
नरेश