लद्दाख के हितधारकों ने संकल्प पारित कर पर्यटन क्षेत्र में बाहरी निवेश को लेकर चिंता जताई

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लद्दाख के हितधारकों ने संकल्प पारित कर पर्यटन क्षेत्र में बाहरी निवेश को लेकर चिंता जताई

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  • Publish Date - April 5, 2026 / 07:19 PM IST,
    Updated On - April 5, 2026 / 07:19 PM IST

लेह, पांच अप्रैल (भाषा) लद्दाख के पर्यटन क्षेत्र के हितधारकों और नागरिक संस्थाओं ने बाहरी निवेशकों के बढ़ते प्रवेश पर चिंता व्यक्त की और क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने की मांग करते हुए एक संकल्प पारित किया है।

‘लद्दाख ट्रैवल ट्रेड एलायंस’ और नागरिक संस्थाओं की एक संयुक्त बैठक में शनिवार को पारित किये गए संकल्प में इस बात पर जोर दिया गया कि पर्यटन क्षेत्र मुख्य रूप से स्थानीय हितधारकों के लिए आरक्षित रहना चाहिए, ताकि स्वामित्व एवं निर्णय लेने का अधिकार समुदाय (स्थानीय लोगों) के पास ही रहे।

संकल्प पर ‘लद्दाख ट्रैवल ट्रेड एलायंस‘, ‘ऑल लद्दाख एडवेंचर एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन’, ‘ऑल लद्दाख होटल एंड गेस्ट हाउस एसोसिएशन’, ‘लद्दाख टैक्सी कोऑपरेटिव सोसाइटी’, ‘मैक्सी कैब ऑपरेटर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी’ और ‘लद्दाख बाइक रेंटल कोऑपरेटिव सोसाइटी’ सहित एक दर्जन से अधिक संगठनों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं।

संकल्प को लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन, लद्दाख गोनपा एसोसिएशन, अंजुमन-ए-मोइन-उल-इस्लाम, अंजुमन इमामिया, क्रिश्चियन एसोसिएशन लेह और गोबा एसोसिएशन जैसे नागरिक संस्थाओं ने अपनी स्वीकृति दी है।

कांग्रेस की लद्दाख इकाई ने भी दो पन्नों के इस संकल्प का समर्थन किया, जिसमें इस क्षेत्र को एक अद्वितीय और संवेदनशील पर्यटन स्थल के रूप में संरक्षित करने का आह्वान किया गया है।

इसमें कहा गया है कि बैठक में सर्वसम्मति से लद्दाख की अनूठी पहचान की रक्षा करने, इसके नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और इसके लोगों के अधिकारों एवं आजीविका को संरक्षित करने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया गया।

संकल्प में कहा गया है कि पर्यटन क्षेत्र मुख्य रूप से स्थानीय हितधारकों के लिए आरक्षित रहेगा और संबंधित नीतियां स्थानीय स्वामित्व, आजीविका एवं निर्णय लेने के अधिकार की रक्षा करने के उद्देश्य से बनाई जाएंगी।

इसमें कहा गया है, “बाहरी निवेश को इस तरह सीमित किया जाएगा कि इससे स्थानीय भागीदारी कमजोर न हो, या उसकी अनदेखी न हो। बाहरी निवेश के प्रभाव से संबंधित किसी भी चिंता – चाहे वह प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष, घोषित या किसी अन्य प्रकार का हो – का समाधान कानूनी तरीकों, संवाद और स्थानीय समुदायों, व्यापार संघों के समन्वित प्रतिनिधित्व के माध्यम से किया जाएगा।”

भाषा राजकुमार सुभाष

सुभाष