कई राज्यों में बारिश संबंधी हालिया आपदाओं के बाद केरल में हुआ भीषण भूस्खलन
कई राज्यों में बारिश संबंधी हालिया आपदाओं के बाद केरल में हुआ भीषण भूस्खलन
तिरुवनंतपुरम, 30 जुलाई (भाषा) केरल के पर्वतीय जिले वायनाड में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में मंगलवार को कम से कम 123 लोगों की जान चली गई। इसने हाल के वर्षों में आई इस तरह की कई अन्य विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं की यादें ताजा कर दी हैं।
जुलाई माह में, कर्नाटक और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों–असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में भूस्खलन की घटनाओं में कई लोगों की मौत हो गई। हालांकि, उनमें वायनाड की तरह व्यापक पैमाने पर तबाही नहीं हुई।
वायनाड में यह घटना कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के शिरुर गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग-66 पर हुए भीषण भूस्खलन के करीब दो सप्ताह बाद हुई, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी।
सोलह जुलाई को हुए उस भूस्खलन के बाद, तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें केरल का एक ट्रक चालक भी शामिल है।
पिछले 10 साल में हुई भूस्खलन की घटनाओं में, उत्तराखंड सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है। 2013 में भारी बारिश के बाद, उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में 5,000 से ज़्यादा लोगों की जान जाने की आशंका जताई गई थी।
वर्ष 2014 में महाराष्ट्र के मालिन गांव में लगातार बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 150 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और कई मकान नष्ट हो गए थे। 2021 में महाराष्ट्र के रायगड जिले के तलिये गांव में 31 लापता लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। यह गांव उस साल जुलाई में भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन से तबाह हो गया था।
वर्ष 2022 में मणिपुर में हुए भूस्खलन में 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई और भारी बारिश के कारण कई लोग घायल हो गए, जिसका असर राज्य की राजधानी इंफाल पर भी पड़ा।
केरल भी ऐसी भीषण मौसमी घटनाओं से अछूता नहीं रहा है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। अगस्त 2018 में आई बाढ़ में राज्य में 483 लोगों की मौत हो गई थी, जिसे राज्य की ‘सदी की बाढ़’ करार दिया गया था।
इस विनाशकारी सैलाब से न केवल लोगों की जान गई, बल्कि संपत्ति और आजीविका भी नष्ट हो गई। इसका असर इतना ज़्यादा था कि केंद्र ने 2018 की बाढ़ को “गंभीर प्रकृति की आपदा” घोषित कर दिया। 3.91 लाख परिवारों के 14.50 लाख से अधिक लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी।
कुल 57,000 हेक्टेयर में लगी फसल नष्ट हो गईं। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बताया था कि इस बाढ़ से हुए नुकसान का अनुमान राज्य के वार्षिक बजट परिव्यय से अधिक है।
साल 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद 2019 में एक और आपदा आई। वायनाड के पुथुमाला में भूस्खलन से 17 लोगों की मौत हो गई। यह स्थान मंगलवार को हुए भूस्खलन क्षेत्रों से लगभग 10 किलोमीटर दूर है।
अक्टूबर 2021 में फिर से लगातार बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिससे राज्य के इडुक्की और कोट्टायम जिलों में 35 लोगों की मौत हो गई।
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2021 में भारी वर्षा और बाढ़ से संबंधित घटनाओं ने केरल में 53 लोगों की जान ली थी।
राज्य सरकार के अनुसार, अगस्त 2022 में भारी बारिश के कारण राज्य में भूस्खलन और बाढ़ से 18 लोगों की मौत हुई और हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, 2015 से 2022 के बीच देश में सबसे ज्यादा भूस्खलन की घटनाएं केरल में हुईं। मंत्रालय के मुताबिक, इस अवधि में देश में भूस्खलन की 3782 घटनाएं हुई जिनमें से 2,239 घटनाएं केरल में हुईं।
भाषा
नोमान नोमान सुभाष
सुभाष

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