नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) मेईती और नगा संगठनों समेत 14 नागरिक संस्थाओं के एक समूह ने मंगलवार को मांग की कि मणिपुर में 2027 की जनगणना तथा परिसीमन से पहले 1951 को आधारवर्ष मानकर राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) की उनकी मांग पर केंद्र व राज्य सरकार के साथ त्रिपक्षीय वार्ता होनी चाहिए।
बातचीत की यह मांग मणिपुर में एक सितंबर से जनगणना का पहला चरण शुरू होने से पहले आई है। ‘पहले एनआरसी, बाद में जनगणना’ की मांग से समुदायों के बीच मतभेद बढ़ गये हैं।
संगठनों ने यहां प्रेसवार्ता में बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारत के रजिस्ट्रार जनरल को प्रतिवेदन दिये हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की।
इस प्रतिनिधिमंडल में मेईती, पंगल या मेईती मुस्लिम और कोम एवं रोंगमेई नगा जनजातियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य लोग भी शामिल थे। इसमें तीन मई, 2023 को मेईती और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा के दौरान अपने घरों से विस्थापित हुए लोगों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
एक बयान में इन संगठनों ने दावा किया कि मणिपुर के लोगों की चाहत और राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय अधिकारियों एवं राजनीतिक नेताओं के सामने इस मुद्दे को पेश करने के तरीके के बीच ‘बहुत बड़ा अंतर’ है।
उन्होंने केंद्र और मणिपुर सरकार से अपील की कि वे जनगणना और परिसीमन से पहले एनआरसी की मांग पर चर्चा के लिए अलग-अलग पक्षों के साथ त्रिपक्षीय बातचीत की व्यवस्था करें।
इन संगठनों ने मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया को टालने और सबसे पहले एनआरसी को अद्यतन करने की मांग की। उनका तर्क था कि परिसीमन के लिए आबादी के नए आंकड़ों का इस्तेमाल करने से पहले नागरिकता तय की जानी चाहिए।
भाषा
राजकुमार अविनाश
अविनाश