केवल ट्रेन टिकट न होने से रेलवे दुर्घटना का दावा खारिज नहीं किया जा सकता: उच्चतम न्यायालय
केवल ट्रेन टिकट न होने से रेलवे दुर्घटना का दावा खारिज नहीं किया जा सकता: उच्चतम न्यायालय
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में कहा कि रेल दुर्घटना के मामले में, मृतक यात्री के पास ट्रेन का टिकट न होने की वजह से उसके परिवार को मुआवज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
रेलवे यात्रियों और उनके परिवारों के अधिकारों को मज़बूत करने के मकसद से दिए गए इस फ़ैसले में रेलवे दावा न्यायाधिकरण (आरसीटी) तथा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के एक जैसे आदेशों को रद्द कर दिया गया, और साथ ही, 2015 में चलती ट्रेन से गिरकर मरने वाले व्यक्ति की पत्नी लता को आठ लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया गया।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एक विधवा की अपील को स्वीकार कर लिया। उसके मुआवज़े के दावे को न्यायाधिकरण और उच्च न्यायालय ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उसके पति का असली यात्री होना साबित नहीं हो सका, क्योंकि दुर्घटना के बाद उसका टिकट नहीं मिला था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि रेलवे अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है और इसकी व्याख्या उदार एवं उद्देश्यपूर्ण ढंग से की जानी चाहिए।
पूर्व के फैसलों का ज़िक्र करते हुए, न्यायमूर्ति करोल ने कहा, ‘‘लाभ पहुंचाने वाले कानूनों की व्याख्या करते समय, शाब्दिक या सीमित नज़रिये के बजाय, विधायिका के इरादों को ध्यान में रखते हुए उद्देश्य आधारित और उदार दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। कुल मिलाकर मकसद यह है कि इरादे को समझा जाए और उसे अमल में लाया जाए।’’
पीठ ने कहा, ‘‘सिर्फ़ इसलिए कि मृतक के पास ट्रेन यात्रा का टिकट नहीं मिला, एक असली यात्री के तौर पर उसकी स्थिति नहीं बदलेगी। यह माना गया है कि दावा करने वाले की शुरुआती ज़िम्मेदारी को हलफ़नामे के ज़रिये पूरा किया जा सकता है।’’
यह मामला चंद्रकांत ठक्कर की मौत से जुड़ा है, जो नवंबर 2015 में रायपुर से अहमदाबाद जाते समय कथित तौर पर अहमदाबाद-हावड़ा मेल ट्रेन से गिर गए थे।
हादसे के बाद उनका ‘ट्रैवल बैग’ गायब हो गया, जिसमें कथित तौर पर ट्रेन का टिकट था।
वकील श्वेता प्रियदर्शिनी के जरिये दायर विधवा की अपील को स्वीकार करते हुए, पीठ ने ‘रेलवे दुर्घटना और अप्रिय घटना (मुआवजा) नियमों’ के तहत अपीलकर्ता को आठ लाख रुपये का मुआवज़ा प्रदान किए जाने का आदेश दिया।
भाषा नेत्रपाल सुरेश
सुरेश

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