मोदी ने आदिवासी नायकों को इतिहास में उनका उचित स्थान दिया, कांग्रेस ने नजरअंदाज किया: भाजपा

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मोदी ने आदिवासी नायकों को इतिहास में उनका उचित स्थान दिया, कांग्रेस ने नजरअंदाज किया: भाजपा

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 06:57 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 06:57 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ‘हूल दिवस’ के मौके पर मंगलवार को आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को ‘‘इतिहास में उनका उचित स्थान’’ दिलाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया और आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में उनके योगदान को जान-बूझकर नजरअंदाज किया।

हूल दिवस 1855-56 में 30 जून को ब्रिटिश शासन के खिलाफ हुए संथाल विद्रोह की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

हूल दिवस के मौके पर, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने 1855 के संथाल विद्रोह का नेतृत्व करने वाले सिदो और कान्हू मुर्मू को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को प्रमुखता से सामने लाने का काम किया है।

सिन्हा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘आज हूल दिवस पर, मैं संथाल समुदाय के दो बहादुर भाइयों सिदो और कान्हू को श्रद्धांजलि देता हूं, जिन्होंने 30 जून, 1855 को अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ सबसे बड़ी क्रांतियों में से एक का नेतृत्व किया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब हम भारत की आज़ादी की लड़ाई की बात करते हैं, तो कांग्रेस सरकारों ने हमेशा हमारे आदिवासी योद्धाओं के योगदान को नज़रअंदाज़ किया और ऐसा जान-बूझकर किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद, उन्होंने हमारी आदिवासी विरासत और परंपरा को सामने लाने की पुरज़ोर कोशिश की।’’

संथाल विद्रोह को याद करते हुए सिन्हा ने कहा कि यह विद्रोह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ आदिवासी प्रतिरोध के लंबे इतिहास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों की भूमिका को उचित पहचान नहीं मिली है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस पार्टी हमारे स्वतंत्रता आंदोलन को हथियाने और इसे अपनी निजी जागीर की तरह मानने की दोषी है। उन्होंने हमारे बहादुर आदिवासी नायकों के योगदान को कभी स्वीकार नहीं किया।’’

भाजपा नेता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत पर सवाल उठाने का भी आरोप लगाया।

सिन्हा ने आरोप लगाया, ‘‘आज जिस तरह राहुल गांधी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को भी बांटने की कोशिश कर रहे हैं और बार-बार (विनायक दामोदर) सावरकर के योगदान पर सवाल उठा रहे हैं, वह दिन दूर नहीं जब वह यह पूछने लगें कि बिरसा मुंडा कौन थे, या सिदो और कान्हू कौन थे।’’

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जिक्र करते हुए सिन्हा ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर उनका आसीन होना संथाल समुदाय को मिल रही मान्यता को दर्शाता है।

भाषा आशीष सुरेश

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