नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) अंतर-प्रचलित आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) के तहत राष्ट्रीय डाटाबेस पर 117 करोड़ से अधिक खोज (सर्च) की जा चुकी हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
आईसीजेएस एक केंद्रीकृत मंच है, जो पुलिस, अदालत, जेल, फॉरेंसिक प्रयोगशाला और अभियोजन तंत्र के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा परस्पर समन्वय की सुविधा प्रदान करता है।
इस प्रणाली में 37.68 करोड़ से अधिक पुलिस रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, जिनमें 9.90 करोड़ प्राथमिकी और 7.64 करोड़ आरोपपत्र शामिल हैं। इसमें हाल ही में जोड़े गए ई-फॉरेंसिक, ई-अभियोजन, आपराधिक प्रक्रिया पहचान प्रणाली तथा राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (नैफिस) मोबाइल ऐप जैसे मॉड्यूल भी शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसी महीने इसे शुरू किया था।
सूत्रों ने बताया कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों, फॉरेंसिक संस्थानों, अभियोजन तंत्र, जेल प्रशासन और न्यायपालिका द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली यह प्रणाली अदालतों की मुकदमा सूचना प्रणाली (सीआईएस) से एकीकरण के उन्नत चरण में है। इस प्रणाली में मामलों का खोज योग्य विवरण उपलब्ध होता है। साथ ही, विभिन्न संस्थाओं के बीच स्वचालित डेटा साझा करने के लिए एपीआई (एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) विकसित किए जा रहे हैं।
तीन नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता, 2023; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023; और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने मंगलवार को लागू होने के दो साल पूरे कर लिए। इन कानूनों ने ब्रिटिश काल के आपराधिक कानूनों की जगह ली है।
अधिकारियों के अनुसार, इन नए कानूनों का उद्देश्य प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर उच्चतम न्यायालय के अंतिम निर्णय तक की पूरी न्यायिक प्रक्रिया को तीन वर्ष के भीतर पूरा करना है।
आईसीजेएस ऐसा मंच बन गया है, जो आपराधिक न्याय व्यवस्था के पांच प्रमुख स्तंभों पुलिस, अदालत, जेल, फॉरेंसिक और अभियोजन के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करता है। इसका उद्देश्य प्रत्येक स्तंभ के लिए विकसित डिजिटल मॉड्यूल क्रमशः सीसीटीएनएस, ई-अदालत, ई-जेल, ई-फॉरेंसिक और ई-अभियोजन के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक तेज और दक्ष बनाना है।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश