नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने शनिवार को दावा किया कि बिहार की दो विधानसभा सीटों पर उसके द्वारा किए गए सर्वेक्षण में ऐसे मतदाताओं की बड़ी संख्या सामने आई है, जिनके नाम मतदाता सूची से कथित तौर पर गलत तरीके से हटा दिए गए हैं।
भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के कारण मतदाता सूची में गड़बड़ी खुलकर सामने आ गई है।
उन्होंने गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किए गए सभी मतदाताओं के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की।
भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी द्वारा भोजपुर जिले के अगिआंव और सीवान जिले के जीरादेई विधानसभा क्षेत्र में कराए गए सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में हटाए गए नाम गलत तरीके से हटाए गए हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगिआंव में यह निष्कर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां उनकी पार्टी महज 95 मतों से चुनाव हार गई थी, जबकि जीरादेई में वह 2,626 मतों के अंतर से पराजित हुई थी।
भट्टाचार्य ने कहा कि अगिआंव में पार्टी ने तीन मतदान केंद्रों पर एसआईआर से पहले हटाए गए 204 मतदाताओं का सर्वेक्षण किया और पाया कि इनमें से 46, यानी 22.5 प्रतिशत, अब भी अपने गांवों में रह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चार मतदान केंद्रों पर एसआईआर के दौरान हटाए गए 665 मतदाताओं की भी जांच की गई और इनमें से 77 यानी करीब 11 प्रतिशत, गांव में रह रहे पाए गए।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के आधार पर पार्टी ने अनुमान लगाया है कि अगिआंव विधानसभा क्षेत्र में 2,000 से अधिक मतदाताओं को गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किया गया हो सकता है।
जीरादेई में पार्टी ने नौ मतदान केंद्रों पर सर्वेक्षण किया और पाया कि एसआईआर के दौरान हटाए गए 665 मतदाताओं में से 122 अब भी गांव में रह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एसआईआर से पहले हटाए गए 189 मतदाताओं में से 15 भी गांव में पाए गए।
भट्टाचार्य ने कहा कि इस विधानसभा क्षेत्र में गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं की संख्या करीब 3,500 हो सकती है।
भाषा हक दिलीप नेत्रपाल
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