चंडीगढ़, दो जनवरी (भाषा) ‘नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन (एनएपीए)’ ने पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा का विशेष सत्र बार-बार बुलाने के फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि इन सत्रों में पारित प्रस्ताव ठोस कार्रवाई या परिणाम में तब्दील नहीं हो पाए हैं।
एनएपीए के कार्यकारी निदेशक सतनाम सिंह चहल ने शुक्रवार को कहा कि विधायी चर्चाएं और प्रस्ताव लोकतांत्रिक शासन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन इनका वास्तविक महत्व इनके सही कार्यान्वयन में निहित है।
उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्यवश, इन विशेष सत्रों के दौरान पारित एक भी प्रस्ताव वास्तविक उपलब्धि के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। पंजाब की जनता के मन में एक सीधा सा सवाल है: यदि इन सत्रों से कोई परिणाम नहीं निकला, तो इन्हें बुलाने का क्या उद्देश्य था?’’
एनएपीए के आकलन के अनुसार, विधानसभा के हर विशेष सत्र पर राज्य के खजाने से लगभग एक करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिसमें सुरक्षा, रसद, कर्मचारी, यात्रा भत्ते और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित खर्च शामिल हैं।
चहल ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब पंजाब गंभीर वित्तीय संकट, बढ़ते कर्ज, बेरोजगारी और खस्ताहाल सार्वजनिक सेवाओं का सामना कर रहा है, तब बिना किसी परिणाम के इस तरह का खर्च करना सरासर गैर-जिम्मेदाराना है।’’
एनएपीए ने कहा कि सरकार ने इन सत्रों को बार-बार ऐतिहासिक और निर्णायक बताकर जनता की उम्मीदें बढ़ा दीं, लेकिन महीनों बाद भी शासन सुधार, जन कल्याण, आर्थिक पुनरुद्धार या संस्थागत जवाबदेही से संबंधित ऐसे प्रस्तावों पर कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
उसने कहा, ‘‘सुर्खियों और राजनीतिक दिखावे के लिए प्रस्ताव पारित करना गंभीर शासन का विकल्प नहीं हो सकता। प्रतीकात्मक राजनीति से समाचारों का चक्र तो चल सकता है, लेकिन इससे लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होता।’’
एनएपीए ने पंजाब सरकार से अब तक विशेष सत्रों में पारित हर प्रस्ताव की स्थिति का विस्तृत विवरण देते हुए एक पारदर्शी सार्वजनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अपील की, जिसमें कार्यान्वयन के लिए स्पष्ट समयसीमा भी शामिल हो।
एनएपीए ने यह भी आह्वान किया कि भविष्य में विशेष सत्र तभी बुलाए जाएं, जब कोई स्पष्ट एजेंडा, कानूनी आवश्यकता और कार्यान्वयन के प्रति प्रतिबद्धता हो।
भाषा
राजकुमार दिलीप
दिलीप