नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े एक धनशोधन मामले में निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने संबंधी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका की सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को नौ मार्च की तारीख तय की।
ईडी ने अपनी याचिका में निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें नेशनल हेराल्ड से जुड़े धनशोधन मामले में कांग्रेस नेताओं- सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ दाखिल उसके आरोप-पत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने गांधी परिवार और अन्य लोगों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया।
ईडी का पक्ष रखने के लिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रतिवादी नेताओं के वकील द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने के अनुरोध पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें दो महीने पहले ही नोटिस दिया जा चुका था।
उन्होंने इसे ‘‘कानून का एक स्पष्ट प्रश्न’’ बताते हुए कहा कि मामले की बहस कानून के आधार पर होनी चाहिए, न कि तथ्यों के आधार पर। उन्होंने यह भी कहा कि निचली अदालत के निष्कर्ष अन्य मामलों में ‘‘बाधा बन रहे हैं’’।
सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि मामले में संज्ञान लेने से इनकार करने के लिए निचली अदालत द्वारा दिए गए कारण ‘‘स्पष्ट रूप से त्रृटिपूर्ण’’ थे।
उच्च न्यायालय ने 22 दिसंबर को गांधी परिवार और अन्य लोगों को मुख्य याचिका के साथ-साथ ईडी के उस आवेदन पर भी नोटिस जारी किया था, जिसमें 16 दिसंबर, 2025 के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था।
निचली अदालत ने आदेश दिया था कि मामले में एजेंसी की शिकायत का संज्ञान ‘‘कानूनन अस्वीकार्य’’ है, क्योंकि यह प्राथमिकी पर आधारित नहीं है।
उच्च न्यायालय ने ईडी की याचिका पर गांधी परिवार के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन, डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड और सुनील भंडारी को भी नोटिस जारी किए थे।
ईडी ने सोनिया और राहुल गांधी, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन के अलावा मोतीलाल वोरा एवं ऑस्कर फर्नांडीस (दोनों अब दिवंगत) के खिलाफ साजिश और धनशोधन का आरोप लगाया है।
ईडी ने आरोप लगाया गया है कि उन्होंने नेशनल हेराल्ड समाचार-पत्र की प्रकाशक कंपनी ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (एजेएल) से संबंधित लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की।
संघीय एजेंसी के मुताबिक, गांधी परिवार के पास यंग इंडियन में 76 प्रतिशत बहुमत हिस्सेदारी है, जिसने 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले एजेएल की संपत्तियों पर ‘‘धोखे’’ से कब्जा कर लिया था।
निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि धनशोधन के अपराध से संबंधित जांच तथा उसके बाद दायर अभियोजन शिकायत (जो आरोपपत्र के समान होती है) विधि अनुसार मान्य नहीं मानी जा सकती, यदि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की अनुसूची में उल्लिखित मूल अपराध के संबंध में प्राथमिकी दर्ज न की गई हो।
इसने कहा था कि एजेंसी की जांच एक निजी शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी, न कि प्राथमिकी के आधार पर, और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा की गई शिकायत तथा उसके परिणामस्वरूप 2014 में जारी किए गए समन आदेश के बावजूद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित अनुसूचित अपराध के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने से परहेज किया।
ईडी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि निचली अदालत के आदेश ने एक तरह से धनशोधन करने वालों के एक वर्ग को केवल इस आधार पर छूट दे दी है कि अनुसूचित अपराध की रिपोर्ट एक निजी व्यक्ति द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत के माध्यम से की गई है।
उसने दावा किया कि गांधी परिवार और अन्य लोगों के विरुद्ध इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उन्हें केवल उद्धृत न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर यह कहकर हल्के में खारिज नहीं किया जा सकता कि कथित अपराधों से संबंधित आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश