एनसीडब्ल्यू पॉश अधिनियम की समीक्षा कर रहा, एक महीने में सौंपेंगे रिपोर्ट : रहाटकर
एनसीडब्ल्यू पॉश अधिनियम की समीक्षा कर रहा, एक महीने में सौंपेंगे रिपोर्ट : रहाटकर
(कोमल शर्मा)
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू)की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने शुक्रवार को कहा कि आयोग पॉश अधिनियम 2013 के क्रियान्वयन की समीक्षा और राष्ट्रव्यापी चर्चा की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद एक महीने के भीतर केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें सौंप सकता है।
रहाटकर ने संवाद प्रक्रिया शुरू करने से पहले ‘पीटीआई-भाषा’से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय परामर्श में शामिल विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल करने के बाद ही सिफारिशों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
आयोग, ‘कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम’ (पॉश अधिनियम) के क्रियान्वयन को लेकर संबंधित लोगों से राय लेने के लिए देश भर में चार क्षेत्रीय विचार-विमर्श सत्र आयोजित करने के बाद अब एक राष्ट्रीय विचार-विमर्श सत्र आयोजित कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘कल, राष्ट्रीय महिला आयोग पॉश पर एक राष्ट्रीय चर्चा कर रहा है। इसमें देश भर के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इससे पहले, हम चार क्षेत्रीय चर्चा सत्र आयोजित कर चुके हैं, जिनसे हमें कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले हैं।’’
रहाटकर ने कहा, ‘‘क्षेत्रीय विचार-विमर्श सत्र और कल होने वाली राष्ट्रीय चर्चा की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, हम पूरे दिन इस बात पर विचार करेंगे कि और क्या किया जाना चाहिए। इसके बाद, सिफारिशों का एक मसौदा तैयार किया जाएगा। सिफारिशों को अंतिम रूप देने के बाद सरकार को भेजा जाएगा।’’
संभावित समय-सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘इसे लगभग एक महीने के भीतर सरकार को भेज दिया जाएगा।’’
इस सवाल पर कि क्या इन सुझावों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यस्थल पर होने वाले उत्पीड़न के नए रूपों से निपटने के उपाय शामिल हो सकते हैं, राहटकर ने कहा कि बातचीत से पहले अंतिम प्रस्तावों के बारे में बताना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इस समय कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि कल बातचीत होनी है। अंतिम सिफारिशें तभी तय की जाएंगी जब हमें विशेषज्ञों के सुझाव मिल जाएंगे और हम उनकी जांच कर लेंगे।’’
एनसीडब्ल्यू ने हालांकि स्वीकार किया कि डीपफेक और डिजिटल रूप से बदली गई सामग्री जैसी नयी प्रौद्योगिकी चुनौतियों ने ऐसी चिंताएं पैदा की हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है।
भाषा धीरज पवनेश
पवनेश

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