नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े विधेयकों का समर्थन करते हुए बृहस्पतिवार को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) नेताओं ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण के लिए वर्षों से इंतजार करना पड़ा है। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यप्रणाली देश के संघीय और लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर सकती है।
लोकसभा में चर्चा करने और पारित करने के लिए बृहस्पतिवार को ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ तथा ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किए गए।
संसद की इस तीन दिवसीय बैठक के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन कर इसे 2029 तक लागू करने का प्रावधान किया जा रहा है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने संसद भवन परिसर में विश्वास जताया कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन को संसद में व्यापक समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा, “महिलाएं वर्षों से इंतजार कर रही हैं और अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है। यह विधेयक सामूहिक रूप से पारित होगा।”
उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा कि इससे किसी राज्य, विशेषकर दक्षिणी राज्यों के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा।
भाजपा सांसद संध्या राय ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे शासन में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मसौदा संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद, 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है।
इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी तथा महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का आवंटन विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में क्रमिक रूप से किया जाएगा।
जदयू सांसद लवली आनंद ने विपक्ष की आपत्तियों को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि जब अभी कुछ हुआ ही नहीं है तो परिसीमन का विरोध क्यों किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के हित में है।
विपक्षी नेताओं ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
कांग्रेस नेता के. सुरेश ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इससे जुड़े परिसीमन प्रस्ताव का विरोध करती है।
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव के खिलाफ प्रक्रिया संबंधी नोटिस दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन विधेयक संविधान पर सीधा हमला है और इससे दक्षिणी राज्यों के अधिकार प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि सीटों में वृद्धि से उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है इसलिए मुद्दे पर राज्यों से व्यापक परामर्श जरूरी है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरीके से सरकार इसे ला रही है, सपा उसका विरोध करती है। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं करेगा।
शिवसेना (उबाठा) सांसद अरविंद सावंत ने भी इसी तरह की चिंता जताई, जबकि द्रमुक सांसद टी आर बालू ने कहा कि उनके नेता एम के स्टालिन ने इस विधेयक के विरोध में कल सलेम में एक रैली के दौरान इसका मसौदा जला दिया।
लोकसभा में राजग की कुल सदस्य संख्या 292 है, जबकि प्रमुख विपक्षी दलों के पास 233 सांसद हैं। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
भाषा
मनीषा माधव
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