नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने मंगलवार को कहा कि भारत में एच1एन1 संक्रमण के मामलों में मौजूदा वृद्धि मौसमी इन्फ्लुएंजा के सामान्य चलन का हिस्सा है और वायरस के किसी नए स्वरूप की पहचान नहीं हुई है।
बहल ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अधिकतर मामले गंभीर नहीं हैं और मरीज बिना किसी विशेष उपचार के अपने आप ठीक हो जाते हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि इस समय फैल रहा वायरस इन्फ्लुएंजा ए (एच1एन1) पीडीएम09 का वही जाना-पहचाना स्वरूप है जो 2009 की महामारी के समय से मौजूद है।
उन्होंने कहा कि एच1एन1 अब मौसमी फ्लू का रूप ले चुका है और इसके अधिकतर संक्रमण गंभीर नहीं होते तथा मरीज अपने आप ठीक हो जाते हैं।
बहल ने कहा, ‘‘जिसे हम आमतौर पर खांसी-जुकाम कहते हैं, वह अक्सर इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होता है और एच1एन1, इन्फ्लुएंजा ए का एक प्रकार है।’’
उन्होंने कहा कि एच1एन1 को पहले आमतौर पर ‘स्वाइन फ्लू’ कहा जाता था लेकिन अब यह हर साल फैलने वाला मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस बन चुका है।
बहल ने कहा कि इन्फ्लुएंजा वायरस समय के साथ अपने स्वरूप में बदलाव करते रहते हैं और यह उनकी सामान्य प्रवृत्ति है।
उन्होंने कहा, ‘‘उनके स्वरूप में हर साल बदलाव होता है। वायरस इसी तरह जीवित रहता है। यह कोई नया स्वरूप नहीं है।’’
बहल के अनुसार, आईसीएमआर के निगरानी आंकड़ों से पता चलता है कि खांसी-जुकाम के लक्षण वाले लोगों में फिलहाल एच1एन1 सबसे अधिक पाया जाने वाला श्वसन संक्रमण है।
उन्होंने कहा, ‘‘खांसी-जुकाम के ज्यादातर मामले एच1एन1 के कारण हो रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से अधिकतर मामले गंभीर नहीं हैं और मरीज अपने आप ठीक हो जाते हैं।’’
बहल ने कहा, ‘‘चिंता की कोई बात नहीं है और यह पता लगाने के लिए हर व्यक्ति की जांच कराने की जरूरत नहीं है कि उसे किस प्रकार के वायरस के कारण खांसी-जुकाम हुआ है।’’
उन्होंने कहा कि हर वायरस का प्रकोप एक समय चरम पर पहुंचता है और उसके बाद मामलों में कमी आने लगती है तथा इस बात का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है कि कोई प्रकोप कब चरम पर पहुंचेगा या उसमें कमी कब शुरू होगी। उन्होंने कहा कि हालांकि, मामलों की संख्या अगले कुछ सप्ताह में घटने की उम्मीद है।
बहल ने कहा कि फिलहाल इन्फ्लुएंजा ए एच1एन1 सबसे अधिक पाया जा रहा है, जबकि एच3एन2 और इन्फ्लुएंजा बी विक्टोरिया के मामले भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के भी कुछ मामले हैं लेकिन उनकी संख्या भी घट रही है।
उन्होंने उपलब्ध निगरानी आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाकर एच1एन1 के कुल मामलों की संख्या का अनुमान लगाने के प्रति भी आगाह किया। बहल ने कहा कि आईसीएमआर इन मामलों में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या का आकलन नहीं करता और इससे संबंधित जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय से ली जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एच1एन1 के कुल मामलों की संख्या जानने के लिए सभी लोगों की जांच करनी होगी और चूंकि आईसीएमआर सभी की जांच कराने की सिफारिश नहीं कर रहा है इसलिए कुल मामलों की संख्या जानने का कोई खास औचित्य नहीं है।
बहल ने फ्लू, खांसी, जुकाम या बुखार से पीड़ित लोगों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने, पौष्टिक भोजन करने और पर्याप्त आराम करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को दूसरों के निकट संपर्क में आने से बचना चाहिए, खांसते या छींकते समय मुंह एवं नाक को ढकना चाहिए, बार-बार हाथ धोने चाहिए और बीमार लोगों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
बहल ने कहा कि सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘इस बात का फिलहाल कोई संकेत नहीं है कि यह बहुत गंभीर बीमारी है।’’
बहल ने हालांकि, बुजुर्गों, कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता वाले लोगों और गर्भवती महिलाओं सहित उन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी है जिनमें स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का अधिक खतरा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोग इन्फ्लुएंजा का टीका लगवाने के बारे में अपने चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।
भाषा सिम्मी पवनेश
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