कोलकाता, 22 मई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता को सदन में कोई कक्ष आवंटित नहीं किया गया है जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल खड़े होते हैं।
इस मुद्दे पर विधानसभा में गतिरोध की स्थिति देखी गई और तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष के लिए प्रस्तावित कक्ष के सामने धरना दिया।
प्रदर्शन में तृणमूल कांग्रेस द्वारा नेता प्रतिपक्ष चुने गए पार्टी विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी, पूर्व मंत्री पुलक रॉय और अरूप रॉय समेत कई अन्य विधायक शामिल हुए।
पार्टी ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और लोकतांत्रिक नियमों तथा संस्थागत परंपराओं को तोड़ रही है।
पार्टी ने कहा, ‘‘विधानसभा लोकतंत्र को कायम रखने के लिए है, फिर भी विपक्ष के नेता को अब भी कक्ष आवंटित होने का इंतजार है। हमारे विधायकों ने आज विधानसभा परिसर में धरना दिया, लोकतांत्रिक नियमों और संस्थागत प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर चिंता प्रकट की।’’
तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बाद भी एलओपी के लिए विशेष कमरा अभी तक आवंटित नहीं किया गया है।
पार्टी ने कहा, “विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है। इसके बावजूद, आज तक विपक्ष के नेता को कमरा आवंटित नहीं किया गया है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक विधानसभा की लॉबी में बैठने को मजबूर हैं, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल खड़े हो रहे हैं।’’
तृणमूल ने आरोप लगाया कि उसने विधानसभा सचिवालय और विधानसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र के माध्यम से चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने के अपने विधायक दल के फैसले से अवगत कराया है।
हालांकि, विधानसभा सचिवालय के सूत्रों ने संकेत दिया कि प्रारंभिक पत्र या प्रस्ताव में स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि तृणमूल के कितने विधायकों ने उस पर हस्ताक्षर किए हैं या उसका समर्थन किया है जिससे इसकी प्रशासनिक वैधता पर सवाल खड़े होते हैं।
इस आपत्ति के बाद तृणमूल कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा के अधिकारियों को एक नया प्रस्ताव जमा किया जिस पर पार्टी सूत्रों के अनुसार 70 विधायकों के दस्तखत हैं।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने सचिवालय के रुख की आलोचना की और आरोप लगाया कि जब भाजपा विपक्ष में थी तो पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार ने इस तरह की मांग नहीं की थी।
बनर्जी ने यह दावा भी किया कि चट्टोपाध्याय को विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया के दौरान नेता प्रतिपक्ष के रूप में आमंत्रित किया गया था जो उनके पद को मान्यता देने के समान है।
बालीगंज से विधायक चट्टोपाध्याय ने चेतावनी दी कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के कमरे के आवंटन में देरी पर पार्टी के विधायक धरना जारी रखेंगे।
पश्चिम बंगाल में हाल में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। पार्टी 294 सदस्यीय सदन में सिर्फ 80 सीटें ही जीत सकी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की।
भाषा
वैभव नरेश
नरेश