कोलकाता, 30 जून (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि पुलिस आरोपी व्यक्तियों या राजनीतिक विरोधियों पर अंडा फेंकने की सभी घटनाओं में प्राथमिकी दर्ज करे।
राज्य में अलग-अलग जगहों पर राजनीतिक विरोध के कारण आरोपियों पर अंडे फेंकने की घटनाओं को रोकने के लिए अदालत से निर्देश जारी करने के अनुरोध संबंधी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की खंड पीठ ने कहा कि किसी आरोपी के मौलिक अधिकारों को छीना नहीं जा सकता।
अदालत ने कहा कि कुछ मामलों में गिरफ्तारी से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता का मामला है।
खंड पीठ ने राज्य को निर्देश दिया कि अंडे फेंकने की ऐसी घटनाओं में पुलिस प्राथमिकी दर्ज करे।
अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह 20 जुलाई को अदालत में एक हलफनामा दाखिल करे, जिसमें अंडे फेंकने की घटना के संबंध में उठाये गए कदमों और पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी की संख्या बताई जाए।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत में कहा कि राज्य सरकार का रुख यह है कि कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता।
उन्होंने बताया कि उन लोगों में से कुछ को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर जबरन वसूली और दूसरे अपराधों के आरोपियों पर अंडे फेंकने का आरोप है।
जनहित याचिका में, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस को अलग-अलग इलाकों में आरोपियों को परेड कराने की छूट दे रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि जब सरकार अपने पुलिस बल के जरिए किसी व्यक्ति को हिरासत में लेती है, तो उस व्यक्ति की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी होती है।
पीठ ने यह भी कहा कि किसी आरोपी के मौलिक अधिकारों को छीना नहीं जा सकता।
भाषा सुभाष पवनेश
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