नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) क्षेत्रीय भाषा के ओटीटी मंच ‘स्टेज’ (एसटीएजीई) ने किसान नेता और समाज सुधारक सर छोटू राम (जिन्हें दादा छोटूराम के नाम से भी जाना जाता है) पर बनी फिल्म जारी करने की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि यह भारत की पहली ऐसी बायोपिक होगी जिसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से बनाया गया है।
कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह परियोजना फिल्म निर्माण की पूरी प्रक्रिया में एआई के इस्तेमाल को लेकर ‘स्टेज’ का प्रयोग है। आमतौर पर एआई का इस्तेमाल ‘डबिंग’, ‘सबटाइटल’ या ‘पोस्ट-प्रोडक्शन’ जैसे कामों तक सीमित रहता है।
मंच के अनुसार छोटूराम के समय और उनके जीवन से जुड़ी परिस्थितियों को दोबारा तैयार करने के लिए दृश्यांकन, किरदार निर्माण, आवाज, बैकग्राउंड संगीत और 3डी दृश्य बनाने में एआई का इस्तेमाल किया गया है।
स्टेज के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विनय सिंघल ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि एआई फिल्म निर्माण की अर्थव्यवस्था को मूल रूप से बदल सकता है, खासकर उन कहानियों और संस्कृतियों के लिए जिन्हें परंपरागत निर्माण महंगा होने के कारण पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य केवल मौजूदा फिल्म निर्माण प्रक्रिया को तेज करने के लिए एआई का इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि यह सोचना है कि फिल्मों को शुरू से किस तरह बनाया जा सकता है। अगर तकनीक ऐसी कहानियां सुनाना संभव बना सकती है, जिन्हें अधिक संस्कृतियों और भाषाओं तक पहुंचाया जा सके और उन कहानियों की सांस्कृतिक गहराई से समझौता न हो, तो एआई भारतीय सिनेमा की अगली पीढ़ी के लिए एक शक्तिशाली माध्यम बन सकता है।’’
सर छोटू राम का जन्म 24 नवंबर, 1881 को हुआ था और उन्हें किसानों का मसीहा माना जाता था। उन्होंने स्वतंत्रता-पूर्व दौर में किसानों को सशक्त बनाने और उनके हितों से जुड़े कानून बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया था।
‘स्टेज’ के सह-संस्थापक और मुख्य कंटेंट अधिकारी परवीन सिंघल ने कहा, ‘‘दादा छोटूराम की कहानी लाखों किसानों के संघर्ष, आकांक्षाओं और सम्मान से जुड़ी है। हम इस कहानी को इस तरह बताना चाहते थे कि यह नई पीढ़ी से जुड़ सके और साथ ही इसके सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संदर्भ भी बरकरार रहें।”
उन्होंने कहा, ‘‘एआई ने हमें ऐसी दुनिया को दोबारा रचने की रचनात्मक संभावना दी, जिसके लिए अन्यथा बहुत अधिक निर्माण संसाधनों की जरूरत होती। हमारे लिए यह परियोजना कहानी कहने का स्थान तकनीक के लेने की बात नहीं है, बल्कि यह तकनीक के जरिए कहानीकारों की संभावनाओं को बढ़ाने के बारे में है।’’
वर्ष 2019 में हरियाणवी सामग्री पर ध्यान केंद्रित करते हुए शुरू किए गए ‘स्टेज’ ने इसके बाद राजस्थानी, भोजपुरी, गुजराती, मराठी, बांग्ला और हिंदी भाषा से जुड़े बाजारों में भी अपना विस्तार किया है।
भाषा संतोष नरेश
नरेश