(आदित्य देव)
नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने संभावनाओं के दरवाजे खुले रखने की वकालत करते हुए कहा कि पाकिस्तान के लोग अंततः अपने इतिहास को समझेंगे और भारत में अपने ‘पूर्वजों की जड़ों और परंपराओं’ की ओर लौटेंगे।
सिंह ने आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले की इस टिप्पणी का भी समर्थन किया कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध को तोड़ने के लिए लोगों से लोगों का संपर्क महत्वपूर्ण है और इसके लिए हमेशा एक अवसर होना चाहिए क्योंकि पड़ोसी देश के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में अब कोई विश्वास नहीं बचा है।
‘पीटीआई वीडियो’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में सिंह ने कहा कि हालांकि पाकिस्तान को स्वतंत्रता के बाद भारत से अलग करके एक स्वतंत्र देश बनाया गया था लेकिन वहां रहने वाले लोगों की जड़ें अब भी भारत में हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख ने कहा, “देर-सवेर, मुस्लिम देश अपने इतिहास पर विचार करेगा और उसे अहसास होगा। और एक बार जब वे अपने इतिहास पर ध्यान देंगे, तो वे अनिवार्य रूप से अपनी पैतृक परंपराओं की ओर लौटेंगे।”
उन्होंने कहा, “अब, यदि हम उन्हें उनकी जड़ों की ओर लौटने में सुविधा प्रदान करना चाहते हैं, तो हमें निश्चित रूप से उनके लिए एक रास्ता खुला रखना होगा।”
उनसे होसबाले की उन टिप्पणियों के बारे में पूछा गया, जो उन्होंने हाल ही में ‘पीटीआई’ को दिए एक साक्षात्कार में की थीं।
सिंह ने कहा, “दत्तात्रेय जी की बात बिलकुल सही है। क्योंकि पाकिस्तान का भूभाग असल में हमारे भूभाग का ही एक हिस्सा है। पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों में, विशेषकर पहाड़ी इलाकों में, विभिन्न जनजातीय समुदायों के लोग निवास करते हैं।”
उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ-साथ पाकिस्तान में हर कोई अपनी जड़ों की ओर वापस लौटेगा।
वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख ने कहा, “चाहे आज हो या कल, हर कोई आखिरकार अपनी परंपराओं की ओर लौट जाएगा। अगर हम दरवाजा पूरी तरह बंद कर दें, तो क्या इससे स्थायी कटाव नहीं पैदा हो जाएगा?”
भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी जुड़ाव की वकालत करते हुए होसबाले ने कहा था, “मुझे लगता है कि यही एक उम्मीद है, क्योंकि मेरा दृढ़ विश्वास है कि अंततः नागरिक समाज संबंध (सफल होंगे)। क्योंकि हमारे बीच सांस्कृतिक संबंध हैं और हम एक राष्ट्र रहे हैं।”
होसबाले ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की सुरक्षा और आत्म सम्मान की रक्षा करना जरूरी है और मौजूदा सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए। लेकिन साथ ही, भारत को अपने दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए बल्कि हमेशा संवाद के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने 26/11, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों का हवाला देते हुए कहा, “देखिए, (कूटनीतिक रूप से) हर संभव प्रयास किया जा चुका है और पाकिस्तान लगातार छोटी-छोटी गलतियां करता रहता है।”
भाषा
प्रशांत नरेश
नरेश