संघ मुख्यालय में बोले प्रणब- राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान, जो किसी धर्म और भाषा में बंटा नहीं

संघ मुख्यालय में बोले प्रणब- राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान, जो किसी धर्म और भाषा में बंटा नहीं

संघ मुख्यालय में बोले प्रणब- राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान, जो किसी धर्म और भाषा में बंटा नहीं
Modified Date: November 29, 2022 / 08:58 pm IST
Published Date: June 7, 2018 3:27 pm IST

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय में पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मैं यहां पर राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं। उन्होंने कहा कि देश के लिए समर्पण ही देशभक्ति है। मुखर्जी ने कहा कि भारत खुला हुआ देश रहा है। भारत के दरवाजे पहले से खुले हुए हैं।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि विविधता में एकता भारत को ख़ास बनाता है। मैं राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं। हमारी राष्ट्रीय पहचान विविधता में एकता से है। भारत का राष्ट्रवाद वसुधैव कुटम्बकम से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि भेदभाव और नफरत करेंगे तो हमारी पहचान को ख़तरा होगा। अलग  भाषा, धर्म और रंग भारत की पहचान है।

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मुखर्जी ने कहा- विविधता और टॉलरेंस में ही भारत बसता है। सिर्फ एक धर्म एक भाषा भारत की पहचान नहीं। पचास सालों में यही मैने सीखा है। सहिष्णुता और विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इतिहास में ह्नेनसांग से लेकर फाह्यान तक ने माना कि भारत एक उदार देश है।

उन्होंने कहा, ‘जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि सबका साथ जरूरी है, देशभक्ति में सभी लोगों का साथ जरूरी। राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान है जो किसी धर्म और भाषा में बंटा नहीं है’। 5000 पुरानी हमारी सभ्यता को कोई भी विदेशी आक्रमणकारी और शासक खत्म नहीं कर पाया।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि  विचारों में समानता के लिए संवाद जरूरी है, संवाद के जरिए हर समस्या का समाधान हो सकता है। लोगों की प्रसन्नता में ही राजा की प्रसन्नता होती है ये बात कौटिल्य ने कही थी। यह बात संसद में एक दीवार पर लिखी हुई है। मुखर्जी ने कहा- आज गुस्सा बढ़ रहा है। हर दिन हिंसा की ख़बर आ रही है। हिंसा, गुस्सा छोड़कर हम सब शांति के रास्ते पर चलें।

अपने संबोधन के अंत में प्रणब ने तय समय से ज्यादा वक्त बोलने के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत से माफी भी मांगी।

वेब डेस्क, IBC24


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