दिल्ली के 75 ऐतिहासिक स्मारकों को पांच साल के लिए गोद ले सकेंगी निजी कंपनियां और एनजीओ

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दिल्ली के 75 ऐतिहासिक स्मारकों को पांच साल के लिए गोद ले सकेंगी निजी कंपनियां और एनजीओ

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 09:05 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 09:05 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) दिल्ली सरकार ने शहर के संरक्षित विरासत स्मारकों के संरक्षण और विकास के लिए दो नई योजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे निजी कंपनियां, गैर सरकारी संगठन और अन्य संस्थान को पांच साल के लिए 75 स्मारकों को गोद ले सकेंगे। साथ ही विशेष संरक्षण और जीर्णोद्धार कार्य के लिए दो करोड़ रुपये तक का अनुदान भी प्रदान किया जाएगा।

एक आधिकारिक बयान मुताबिक, दिल्ली सरकार ‘हमारे स्मारक, हमारा गौरव’ योजना के अंतर्गत ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ और ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ शुरू की है और दोनों ही योनजाओं को कैबिनेट ने भी मंजूरी प्रदान कर दी है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ के अंतर्गत सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), निजी कंपनियां, पंजीकृत एनजीओ, ट्रस्ट, संस्थाएं और इच्छुक नागरिक स्वैच्छिक योगदान के माध्यम से दिल्ली सरकार के ऐतिहासिक स्मारकों को गोद ले सकेंगे।

उन्होंने कहा, “ऐसे सहयोगी ‘स्मारक मित्र’ कहलाएंगे। वर्तमान में दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के संरक्षण में 75 ऐतिहासिक स्मारक हैं। इस योजना के तहत ‘स्मारक मित्र’ संबंधित स्मारक पर साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, लाइट एंड साउंड जैसी पर्यटक सुविधाओं के विकास, संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च स्वयं वहन करेंगे। इसके तहत प्रत्येक गोद लिए गए स्मारक पर दिल्ली सरकार को औसतन लगभग 4.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष की बचत होगी।”

गुप्ता के अनुसार, स्मारक अभिग्रहण की अवधि पांच वर्ष होगी और इसके लिए दिल्ली सरकार, संबंधित भूमि स्वामी एजेंसी और ‘स्मारक मित्र’ के बीच त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ के तहत सरकार पात्र एवं विशेषज्ञ संस्थाओं को स्मारकों के मूल संरक्षण, जीर्णोद्धार और अन्य तकनीकी संरक्षण कार्यों के लिए दो करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी।

उन्होंने कहा, “इस योजना का लाभ राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर पंजीकृत स्वैच्छिक संगठन, ट्रस्ट, फाउंडेशन, शैक्षणिक संस्थान, विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय और केंद्र एवं राज्य सरकारों के स्वायत्त संस्थान प्राप्त कर सकेंगे। स्वैच्छिक संगठनों, ट्रस्ट, फाउंडेशन और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भारत सरकार के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।”

उन्होंने बताया कि वर्तमान में दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन 75 स्मारकों में से 21 स्मारकों का मूल संरक्षण दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) द्वारा कराया जा रहा है। नई योजना के माध्यम से इस कार्य में पात्र एवं विशेषज्ञ संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों योजनाओं से कुशल, अर्धकुशल और पेशेवर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, पारंपरिक शिल्पों को बढ़ावा मिलेगा, युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ेगी और स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।

उनके मुताबिक, दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि उन्हें जनभागीदारी के माध्यम से जीवंत सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना है।

भाषा नोमान

नोमान माधव

माधव

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