नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) युवराज सिंह मनचंदा की शादी में बस कुछ ही हफ्ते बाकी थे और उसने इसके लिए नयी शेरवानी भी खरीद ली थी।
मनचंदा (31) ने एक बैठक के बाद घर लौटने का वादा किया था जो पूरा नहीं हो सका। उनकी गुमशुदगी का दुखद अंत कथित हत्या और गुरुग्राम के एक नाले में उनका शव मिलने के साथ हुआ।
लेकिन परिवार के लिए यह त्रासदी केवल मौत तक सीमित नहीं रही। युवराज के परिवार का आरोप है कि उनका शव 10 सितंबर को गुरुग्राम पुलिस ने बरामद कर लिया था, लेकिन उन्हें इसकी कोई सूचना नहीं दी गई और चार दिन बाद उनकी (परिवार) जानकारी के बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।
परिवार का कहना है कि उन्हें शव बरामद होने की जानकारी दिल्ली पुलिस के पास गुमशुदगी दर्ज कराने और जांच शुरू होने के बाद ही मिली।
पत्रकार से बातचीत में युवराज की बहन करिश्मा ने कहा कि परिवार ने छह सितंबर को शाम करीब 7:30 बजे उनसे आखिरी बार बात की थी। तब उन्होंने बताया था कि वह जिस महिला से मिलने जा रहे हैं, वह करीब 20 मिनट में पहुंचने वाली है और मीटिंग के बाद वह फोन करेंगे।
करिश्मा ने कहा, ‘‘वह शादी की खरीदारी के लिए हमारे साथ लाजपत नगर गए थे। एक महीने में उनकी शादी होने वाली थी। अपनी शेरवानी फाइनल करने के बाद, वह यह कहकर निकले कि उनकी अपनी एक पूर्व महिला सहकर्मी के साथ मीटिंग है। उन्होंने इस मीटिंग के बारे में अपनी मंगेतर और अपने बॉस को भी बताया था।’’
करिश्मा ने कहा कि उन्होंने मीटिंग के बाद फोन करने को कहा था। लेकिन ‘‘इसके बाद हमें सिर्फ मैसेज ही मिलते रहे।’’
उनके अनुसार, युवराज ने शुरुआत में मैसेज किया कि वह ठीक हैं, परिवार को चिंता न करने को कहा और लिखा कि उनका फोन स्विच ऑफ हो सकता है। बाद में, उन्होंने शनिवार को लौटने की बात कही और फिर आने का दिन बृहस्पतिवार बताया।
उन्होंने बताया, ‘‘ फिर मेरी बहन ने उनसे कम से कम अपना चेहरा दिखाने की गुजारिश की। उसने पूछा कि वे फोन क्यों नहीं कर रहे या घर क्यों नहीं आ रहे। वे कभी ऐसा नहीं करते। हम घबराने लगे क्योंकि उन्होंने कभी कुछ गलत नहीं किया।’’
युवराज का अचानक गायब होना परिवार के लिए बेहद चिंताजनक था। परिवार के मुताबिक, उनके पिता आंशिक रूप से पक्षाघात (लकवा) से पीड़ित हैं और उनकी मां भी अक्सर बीमार रहती हैं।
युवराज के बचपन के दोस्त रजत जैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बचपन से ही उसने अपने घर की जिम्मेदारी संभाल ली थी।’’
परिवार ने युवराज के लौटने का इंतजार किया फिर 11 सितंबर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद दिल्ली पुलिस की जांच उनकी पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसके पति संयम सचदेवा पर केंद्रित हो गई।
तकनीकी निगरानी के जरिए अन्या वत्स की मौजूदगी का पता चलने के बाद, पुलिस ने दोनों को उत्तराखंड के एक पीजी से गिरफ्तार किया, जहां वे रह रहे थे। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान उन्होंने कथित तौर पर खुलासा किया कि युवराज की हत्या कर दी गई थी और उनके शव को गुरुग्राम में उनके घर के पास एक नाले में फेंक दिया गया था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हत्या का कथित कारण युवराज और वत्स के बीच वित्तीय विवाद लगता है। युवराज, वत्स और संयम पहले एक ही रियल एस्टेट कंपनी में साथ काम करते थे।
वत्स को वित्तीय अनियमितताओं के कारण कंपनी से निकाल दिया गया था।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के वित्तीय विवरण की शुरुआती जांच से पता चला है कि पर्याप्त पैसे न होने के बावजूद वे बेहद आलीशान जीवन जी रहे थे। पुलिस ने बताया कि वत्स ‘फ्रीलांसिंग’ कर रही थी और कुछ रियल एस्टेट सौदों में युवराज की मदद कर रही थी। जांचकर्ता उनके वित्तीय लेन-देन के स्वरूप और हत्या की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर युवराज से उनकी कार पार्क करवाई और फिर उन्हें अपनी एसयूवी में बिठा लिया। युवराज आगे की सीट पर बैठे थे, जबकि वत्स उनके पीछे बैठी थी और सचदेवा गाड़ी चला रहा था। सूत्रों का दावा है कि वत्स ने पीछे से युवराज की गर्दन में गोली मार दी।
हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है कि युवराज की हत्या कैसे की गई थी।
इससे पहले 10 सितंबर को गुरुग्राम पुलिस ने बादशाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक नाले से एक अज्ञात शव बरामद किया था।
परिवार का आरोप है कि दिल्ली में युवराज की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद उन्हें इस अज्ञात शव के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई।
करिश्मा ने बताया कि परिवार को बाद में दिल्ली पुलिस की जांच के दौरान पता चला कि शव 10 सितंबर को ही मिल गया था।
करिश्मा ने कहा, ‘‘उन्होंने कहा कि शव क्षत-विक्षत चुका था इसलिए उन्होंने उसे तीन दिन तक रखा और 14 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया। मैंने उनसे गुजारिश की कि मुझे उनकी कोई ऐसी चीज दे दें जिसे मैं अपनी मां को दिखा सकूं। उन्होंने हमें कुछ नहीं दिया। उन्होंने अंगूठी और घड़ी भी पहनी हुई थी, लेकिन हमें कुछ नहीं मिला।’’
परिवार ने इस शुरुआती स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाया कि युवराज की मौत डूबने से हुई थी।
वत्स और सचदेवा का एक साल का बच्चा है। उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस वत्स के पिछले मामलों की भी जांच कर रही है, जिसमें संसद मार्ग और ग्रेटर नोएडा थानों में आईटी एक्ट और धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं।
इसके अलावा, संयम की पूर्व पत्नी की शिकायत पर जगतपुरी थाने में दर्ज एक अन्य मामले में अन्या और संयम के खिलाफ आईटी एक्ट और घरेलू हिंसा के आरोप शामिल हैं।
भाषा शोभना अविनाश
अविनाश