नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बृहस्पतिवार को नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में राज्य से जुड़े लंबित मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया और पंजाब को विशेष श्रेणी का दर्जा देने व सीमावर्ती क्षेत्रों के पुनर्विकास के लिए विशेष वित्तीय पैकेज उपलब्ध कराने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए 90:10 में वित्तपोषण के साथ ‘विशेष श्रेणी राज्य’ का दर्जा दिया जाना चाहिए।
बैठक को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि एक सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब अभूतपूर्व सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य की आकांक्षाएं पूरी तरह से ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप हैं।
पंजाब की विशेष परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है। राज्य लंबे समय से कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, जिनमें सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद, ड्रोन के जरिए हेरोइन और हथियारों की तस्करी प्रमुख हैं। इसके कारण युवाओं में नशे की समस्या बढ़ी है, संगठित अपराध को बढ़ावा मिला है और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की निगरानी में अंतरराष्ट्रीय सीमा और सुरक्षा बाड़ के बीच खेती करने वाले किसानों को रोजमर्रा की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।”
विकास योजनाओं में असमानता का मुद्दा उठाते हुए मान ने कहा, “हाल में शुरू किए गए ‘वाइब्रेंट विलेज-द्वितीय’ कार्यक्रम के तहत केवल 107 गांवों को शामिल किया गया है, जबकि सीमा से सटे इलाकों में 2,000 से अधिक गांव और कस्बे स्थित हैं।”
मान ने कहा, “पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा को और अधिक सुरक्षित तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाने व पंजाब के सामने मौजूद जटिल संकट से निपटने के लिए हमने कई बार केंद्र सरकार के समक्ष तत्काल मांगें रखी हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, इन मांगों पर केंद्र की प्रतिक्रिया बेहद सीमित और उदासीन रही है।”
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मई 2025 में नीति आयोग की शासी परिषद की 10वीं बैठक में उठाए गए मुद्दों के साथ-साथ इस बार रखी गई मांगों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
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खारी माधव
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