होशियारपुर (पंजाब), 18 सितंबर (भाषा) पंजाब में होशियारपुर की एक विशेष त्वरित अदालत ने शुक्रवार को 33-वर्षीय उस प्रवासी मजूदर को मौत की सजा सुनाई जिसने पिछले साल सितंबर में पांच-वर्षीय एक बच्चे का गंभीर यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसकी हत्या कर दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनप्रीत कौर ने इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ मामला बताते हुए निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के निवासी नानके यादव उर्फ राधेश्याम को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत फांसी दी जाए।
हालांकि, आदेश में कहा गया है कि मौत की सजा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पुष्टि के अधीन है।
अदालत ने राधेश्याम को बीएनएस की धारा 140(1) के तहत 10 साल के कठोर कारावास, धारा 238 के तहत सात साल जेल, यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा-छह के तहत 20 साल और धारा 10 के तहत पांच साल की सजा भी सुनाई।
ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और प्रत्येक धारा के तहत 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
इसके अलावा, अदालत ने ‘पंजाब पीड़ित या उनके आश्रित मुआवजा योजना, 2011’ के तहत मृत बच्चे के माता-पिता को मुआवजे के रूप में पांच लाख रुपये देने का भी आदेश दिया।
अदालत ने पाया कि यादव ने नाबालिग लड़के का अपहरण किया, उसका साथ गंभीर यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसकी हत्या कर दी।
अदालत ने 15 सितंबर, 2026 को यादव को दोषी ठहराया और सज़ा की अवधि पर अपना फ़ैसला 18 सितंबर के लिए सुरक्षित रख लिया।
जब तक पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय मौत की सज़ा की पुष्टि नहीं कर देता, तब तक इसे लागू नहीं किया जाएगा।
वकील ने बताया कि दोषी को फ़ैसले और सज़ा के आदेश के ख़िलाफ़ 30 दिनों के भीतर अपील करने के उसके अधिकार के बारे में भी बता दिया गया है।
भाषा
सुरेश दिलीप
दिलीप