नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) सरकार ने नकली और घटिया दवाइयों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ‘क्यूआर कोड’ आधारित प्रणाली का दायरा बढ़ा दिया है ताकि इसमें सभी सूक्ष्मजीवरोधी, टीके, कैंसर-रोधी और मन:प्रभावी दवाइयों को शामिल किया जा सके।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘औषधि नियमावली, 1945’ में बदलावों को अधिसूचित किया है। इसके तहत दवाइयों की इन श्रेणियों को ‘अनुसूची एच2’ में शामिल किया गया है, जिसके लिए उत्पाद की पहचान और सत्यापन के लिए बार कोड या ‘क्विक रिस्पॉन्स’ (क्यूआर) कोड का इस्तेमाल करना जरूरी है।
मंत्रालय ने कहा कि संशोधित प्रावधानों के तहत, विनिर्माताओं को दवा के प्राथमिक पैकेजिंग लेबल पर, या अगर जगह की कमी हो तो द्वितीयक पैकेजिंग पर, बारकोड या क्यूआर कोड छापना या लगाना होगा।
‘द्वितीयक पैकेजिंग’ या ‘सहायक पैकेजिंग’ उत्पाद की पैकेजिंग की वह बाहरी परत होती है जो प्राथमिक पैकेजिंग को सुरक्षित रखती है और इसके तहत कई समान उत्पादों को एक साथ रखा जाता है।
यह कोड आपूर्ति श्रृंखला में सॉफ्टवेयर ऐप के जरिए दवाइयों के प्रमाणन और सत्यापन को संभव बनाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, क्यूआर कोड में उत्पाद से जुड़ी जरूरी जानकारी होगी जैसे कि अनूठा उत्पाद पहचान कोड, ‘जेनेरिक’ और ब्रांड के नाम, कंपनी का नाम और पता, बैच नंबर, विनिर्माण और उपयोग में लाने की समय सीमा, विनिर्माण लाइसेंस नंबर आदि।
मंत्रालय ने कहा कि यह नियम पहले देश के सिर्फ शीर्ष 300 फार्मास्युटिकल ब्रांड पर लागू होता था।
ताजा बदलाव के साथ, इसके दायरे को काफी बढ़ा दिया गया है। अब इसमें सभी टीके, सूक्ष्मजीवरोधी, कैंसर-रोधी दवाइयां तथा स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत विनियमित होने वाली दवाइयां भी शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि कि बेहतर प्रणाली से आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न चरणों में उत्पादों की प्रमाणिकता और सत्यापन संभव हो सकेगा, जिससे नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ सुरक्षा उपाय मजबूत होने की उम्मीद है।
अधिसूचना के अनुसार, टीके, कैंसर-रोधी दवाइयों और एनडीपीएस अधिनियम के तहत विनियमित होने वाली दवाइयों से जुड़े नियम इस साल 1 जुलाई से लागू होंगे जबकि सूक्ष्मजीवरोधी से जुड़े नियम 1 जुलाई 2028 से प्रभावी होंगे।
भाषा सुभाष नरेश
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