अनुसंधानकर्ताओं ने बाइपोलर डिसऑर्डर के सबसे प्रभावी उपचार की पहचान की

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अनुसंधानकर्ताओं ने बाइपोलर डिसऑर्डर के सबसे प्रभावी उपचार की पहचान की

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  • Publish Date - August 12, 2026 / 05:15 PM IST,
    Updated On - August 12, 2026 / 05:15 PM IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) अनुसंधानकर्ताओं ने ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ के 116 अलग-अलग इलाज के तरीकों से जुड़े 77 ‘मेटा-एनालिसिस’ की समीक्षा की है और अलग-अलग उम्र और मूड के दौर में सबसे असरदार तरीकों की पहचान की है।

‘मेटा-एनालिसिस’ एक सांख्यिकीय विधि है जिसमें एक ही विषय पर किए गए कई अलग-अलग अध्ययनों के परिणामों को जोड़कर एक मजबूत और सटीक निष्कर्ष निकाला जाता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक समस्या है, जिसमें मिजाज, ऊर्जा स्तर और गतिविधि स्तर में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव आते हैं। इस बीमारी में अवसाद के दौर हो सकते हैं, जिनमें मूड और ऊर्जा कम हो जाती है, या फिर मेनिया (उन्माद) की स्थिति हो सकती है, जिसमें मूड और गतिविधि का स्तर बहुत अधिक हो जाता है।

कनाडा के ओटावा अस्पताल और स्पेन, इटली, फ्रांस तथा ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों के अनुसंधानकर्ताओं की अगुवाई में, ईबीआई-बीडी (द्विध्रुवीय मनोदशा विकार के लिए तथ्य आधारित अध्ययन) तैयार किया गया है।

ईबीआई-बीडी एक ऐसा इंटरनेट मंच है जहां उपलब्ध जानकारी, शोध पत्र, आंकड़ों या अध्ययन सामग्री को बिना किसी शुल्क के कोई भी व्यक्ति उपयोग कर सकता है। यह ‘द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल’ में प्रकाशित ‘सबसे व्यापक’ समीक्षा के नतीजों के आधार पर, हर इलाज के प्रभाव, दुष्प्रभाव को साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करती है।

शोध पत्र लेखक और मनोचिकित्सक डॉ. मिशेल डी प्रिस्को ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि चिकित्सक इस मंच का इस्तेमाल अपने मरीजों के लिए कर पाएंगे और हर मरीज की जरूरतों के हिसाब से असर और दुष्प्रभाव के बीच सबसे अच्छा संतुलन बना पाएंगे।’’

डॉ. प्रिस्को स्पेन के हॉस्पिटल क्लिनिक डी बार्सिलोना में मनोचिकित्सक और यूनिवर्सिटी ऑफ़ बार्सिलोना में अनुसंधानकर्ता हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इस मंच और इसमें शामिल प्रेफरेंस टूल का इस्तेमाल करके, डॉक्टर और मरीज मिलकर तय कर सकते हैं कि आगे किस इलाज पर विचार किया जाए।’’

ओटावा अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख और ओटावा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर व शोधपत्र लेखक डॉ. जेस फ़िडोरोविज़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारी की दवाओं के कई तरह के दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘एक ऐसा टूल जो मरीज की पसंद को शामिल करता है और मिलकर फैसला लेने को बढ़ावा देता है, वह ऐसे इलाज खोजने में मदद कर सकता है जो अधिक बेहतर हों।’’

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि इस समीक्षा अध्ययन का इस्तेमाल बाइपोलर डिसऑर्डर के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देशों को अद्यतन करने में भी किया गया है, जिसमें इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर बाइपोलर डिसऑर्डर के दिशानिर्देश भी शामिल हैं।

उनका कहना है कि यह पहला विस्तृत समीक्षा अध्ययन है जिसमें इस मनोविकार के किसी भी आयुवर्ग और चरण के लिए अब तक उपलब्ध सबसे बड़े और बेहतरीन मेटा-एनालिसिस में आंकी गई सभी रणनीतियों को शामिल किया गया है।

भाषा धीरज वैभव

वैभव