संजय सिंह अब राज्यसभा में लंबे भाषण नहीं दे पाएंगे: भाजपा का आप सांसद पर निशाना

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संजय सिंह अब राज्यसभा में लंबे भाषण नहीं दे पाएंगे: भाजपा का आप सांसद पर निशाना

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 07:54 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 07:54 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) सांसद संजय सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि सात सदस्यों के सत्तारूढ़ दल में शामिल होने के बाद सदन में उनकी पार्टी की घटती संख्या के कारण वह अब राज्यसभा में ‘‘लंबे भाषण’’ नहीं दे पाएंगे।

राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन द्वारा आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भाजपा में विलय को आधिकारिक रूप से स्वीकार किए जाने के बाद भाजपा ने यह तंज किया। अब उच्च सदन में अरविंद केजरीवाल की पार्टी की संख्या 10 से घटकर तीन हो गई, वहीं उच्च सदन में भाजपा की संख्या बढ़कर 113 हो गई।

सिंह ने रविवार को राधाकृष्णन को एक याचिका सौंपकर उच्च सदन में पार्टी के सात सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी।

इस घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को सोमवार को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया

हुसैन ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘ संजय सिंह को अपने साथी सांसदों की कमी जरूर खल रही होगी क्योंकि वे उनकी ताकत के बारे में लंबे-लंबे भाषण दिया करते थे… अब संजय सिंह को अपने विचार कुछ ही शब्दों में रखने होंगें’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘ संजय सिंह अब लंबे भाषण नहीं दे पाएंगे। पहले तो वह (आप के) 10 सांसदों के समर्थन से समय हासिल कर लेते थे।’’

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने आम आदमी पार्टी के सभी सात पूर्व सांसदों का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भारत को विकसित देश बनाने का संकल्प उनके अनुभव से और भी मजबूत होगा।

भाजपा से राज्यसभा सदस्य विनोद तावड़े ने एक पोस्ट में लिखा, ‘‘आम आदमी पार्टी के सातों सांसद अब भाजपा में।’’

इस बीच, सिंह ने कहा कि अगर दलबदल विरोधी कानून के तहत पार्टी के सात पूर्व सांसदों को अयोग्य घोषित नहीं किया जाता है तो आम आदमी पार्टी अदालत का रुख करेगी।

आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘राज्यसभा के सभापति ने उन सात सांसदों द्वारा प्रस्तुत पत्र का संज्ञान लिया है और उसी के आधार पर उनके विलय को स्वीकार कर लिया है। हमारे द्वारा उठाई गई आपत्ति और संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की मांग पर तो विचार भी नहीं किया गया है।’’

भाषा शोभना नरेश

नरेश